उत्तर प्रदेश:प्रेशर पॉलिटिक्स और दल- बदल में फेल हुई भाजपा
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-अनुप्रिया पटेल, ओ पी राजभर, संजय निषाद, सुषमा पटेल और भाजपा के केशव मौर्य व गिरीश यादव भी पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वोटर को पार्टी से खिसकने में नहीं रोक पाए l
-गुजरात के पुरुषोत्तम रूपला की राजपूतों के लिए फिसली ज़ुबान माफ़ी मांगने के बावजूद चिंगारी से शोला बनी lआग ऐसी भड़की की यूपी उसकी लपट में आधा से ज्यादा साफ़ हो गया l
-भाजपा हाई कमान अपनी गलती माने या न माने लेकिन अपने नेताओं की उसे कद्र नहीं, उधर सपा अपने आधा दर्जन विधायकों को बाहर करने जा रही, इन्हें भाजपा लपकती है तो फायदा की बजाय यह भी बीज भंडार साबित होंगे l
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-कैलाश सिंह-
लखनऊ/वाराणसी l उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से इस बार अकेले 37 सीट सपा और इंडिया गठबंधन ने 46 सीट हासिल करके भाजपा को जहां 33 सीट पर समेट दिया वहीं यह भी संदेश दिया कि यूपी में जातिगत समीकरण साधने में हम आपसे आगे हैं l बानगी 2022 के विधानसभा चुनाव में डिप्टी सीएम केशव मौर्य की पराजय से मिलने के बाद भी भाजपा अदर बैकवर्ड व दलित को साधने में जुटी रहीl ओ पी राजभर और संजय निषाद अपने बेटों को नहीं जिता पाए और अनुप्रिया पटेल तो केवल अपनी सीट लोटपोट कर बचा पाईं l
जौनपुर जिले को बानगी के तौर पर देखें तो 2017 में मुंगरा बादशाहपुर से सपा से विधायक रहीं सुषमा पटेल को 2022 के चुनाव में मदियाहूँ से हारने के बाद प्रेशर बनाकर इसलिए लिया क्योंकि मुंगरा में 30 हजार के मुकाबले मदियाहूँ में लगभग 60 हजार पटेल वोटर हैं जो लोकसभा चुनाव में काम कर जाएंगे लेकिन गणित फेल हुई और यहाँ अनुप्रिया पटेल कार्यक्रम लगने के बाद भी नहीं आईं l यह विधान सभा मछली शहर लोकसभा में आती है l भाजपा ने पुराने प्रत्याशी बीपी सरोज पर भरोसा जताया लेकिन उनकी पहली जीत 181 वोट से हुई पोस्टल बैलेट से, जबकि इनकी शिकायत पिछले कार्यकाल की मिल चुकी थी की यह पार्टी के कोर वोटर राजपूत, ब्राहमन, अदर बैकवर्ड में से सैकड़ों लोगों पर एस सी/एस टी में मुकदमा कराये हैं और यह बसपा से भाजपा में आये लेकिन विचारधारा नहीं बदल पाए l भाजपा के पास जिले की दोनों सीटों के लिए उपयुक्त नेता पूर्व सांसद विद्या सागर सोनकर उपलब्ध हैं l एम एल सी श्री सोनकर ही ऐसे नेता हैं जो दलितों से अधिक सवर्णों और पिछड़ों में मान्य यानी सर्वमान्य हैंl
पिछले महीनों में राज्यसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करने वाले सपा विधायक मनोज पांडेय, राकेश पांडेय, अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, पूजा पाल और विनोद चतुर्वेदी लोकसभा चुनाव में अपनी बिरादरी के वोट भाजपा की तरफ़ करने में विफ़ल रहे l जबकि इसी चुनाव में वोट की लालच में भाजपा हाई कमान ने अभय सिंह को वाई श्रेणी की सुरक्षा भी दिया l जौनपुर के राज्य मंत्री गिरीश यादव जातिगत तो दूर अदर बैकवर्ड, मौर्य वोट को भाजपा में नहीं रोक पाए l केशव मौर्य तो यहाँ आकर सभा भी किए लेकिन मौर्य वोटर उन्हें अपना नेता तक मानने से इंकार कर दिया l
दूसरी तरफ़ राजपूतों की नाराज़गी पर नज़र डालें तो गुजरात से चली चिंगारी वाया राजस्थान होते यूपी में राजभर व अपना दल के नेताओं की बदज़ुबानी से शोला बन गई और राजा भैया रघुराज प्रताप सिंह तक पहुँच कर उसकी लपट आसमान छूने लगी l







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