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 मौत की बारिश 2: ऊर्जा व नगर निकाय मंत्री से मिलेगा पब्लिक के हर सवाल का जवाब! 





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कैलाश सिंह/रुद्र प्रताप सिंह-

तहलका न्यूज नेटवर्क

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-बीते 25-26 अगस्त को जौनपुर शहर में तीन युवाओं की दिल दहला देने वाली मौत की घटना ने यहां के हर बाशिंदे के दिल को छलनी और दिमाग को ऐसा सुन्न कर दिया जिससे लोग अभी तक नहीं उबर सके हैं, यदि किसी की सेहत पर फर्क नहीं पड़ा तो वह है शासन का नुमाइंदा प्रशासन, जिसका हिस्सा बिजली विभाग व शहरी विकास यानी नगर पालिकाl

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लखनऊ/जौनपुरl अब तो जौनपुर शहर का हर बाशिंदा आसमानी बौछार पड़ते ही सिहर उठता हैl उसे उमसभरी गर्मी बर्दास्त है, लेकिन कड़कती बिजली के साथ तेज वर्षा यानी 'मौत की बारिश' से हर किसी के तन में सिहरन दौड़ जाती है, क्योंकि आसमानी बिजली से ज्यादा भय जमीन के 'करंट और नालों के गड्ढों' से लगने लगा हैl उस घटना के पांच दिन बाद भी करंट सप्लाई करने वाले बिजली के पोल पर पन्नी नहीं चिपकाई जा सकी हैl अलबत्ता नगर पालिका नाले-नालियों से सिल्ट और विद्युत विभाग तारों पर लटकी पेड़ों की टहनियों को काट रहा हैl जबकि यह कार्य जून महीने में ही हो जाने चाहिए थेl समूचे मीडिया को सड़कों के हर गड्ढे में मौत नज़र आ रही हैl 

आज़ 30 अगस्त शनिवार को तड़के पांच बजे शुरू हुई बादलों की चमक- गरज के साथ तेज़ वर्षा ने एक बार फ़िर 'मौत की बारिश' का एहसास करा दिया है, हर सड़क और निचले इलाकों के घर भी सराबोर हो गए,लेकिन विद्युत विभाग जो 25 अगस्त को हुई घटना से एक घंटे पहले प्रशासनिक बैठक में दावा किया था कि सभी 'पोल पन्नी से लैस' यानी सुरक्षित किये जा रहे हैं वह खम्भे पांचवें दिन भी नंगे नज़र आ रहे हैंl अब ऊपर से आसमानी बिजली व जमीन पर पोल और टूटे तारों के करंट के बीच फंसा है जन -जीवनl घटना वाले दिन नाले के सीवर वाले मेनहोल में गिरी युवती प्राची मिश्रा खुद बचकर निकल जाती या फ़िर समीर और शिवा भी बचा लेते लेकिन तीनों को मेनहोल में प्रवाहित करंट ने बेबस यानी ताकत विहीन कर दिया थाl

अब आता है 'वही यक्ष प्रश्न: तीन युवाओं की मौत का जिम्मेदार कौन'? तो मीडिया और पब्लिक की नज़र में दोषी हैं ये चार लोग, उनमें नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी और मुख्य व अधिशासी अभियन्ता विद्युत विभागl यदि सुश्री मायावती का शासन रहा होता तो शर्तिया इन्हीं लोगों पर बिजली ( गाज़)गिरतीl इन जिम्मेदारों को छोड़कर मातहतों को हल्के फीते से नापकर कोरम पूरा मान लिया गयाl यही कारण है कि पांच दिन बाद भी शहर के गड्ढों और नंगे खंभे जस के तस हैंl हाँ इतना जरूर हुआ कि खेल एवं युवा कल्याण मन्त्री गिरीश चंद्र यादव नगर विधायक और यहां के बाशिंदा होने के नाते मृतकों के परिजनों के घर पहुंचे और वह सांत्वना के साथ शासन के जरिए आपदा राहत की रकम और आवास आदि हर संभव सहायता दिलाने में लगे हैं, जबकि स्थानीय सांसद जो दूसरे जनपद के निवासी हैं उनका पता ही नहीं चलाl

पब्लिक की तरफ़ से मीडिया द्वारा जिन दो विभागों की लापरवाही पर सवाल पूछने हैं उसके लिए जवाबदेह नगर निकाय और ऊर्जा मन्त्री ए के शर्मा ही हैंl अब उनके ही जौनपुर आगमन का इंतजार हैl इसके सिवा कोई चारा नहीं है! वह जौनपुर के प्रभारी मंत्री भी हैंl

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