भारत की कूटनीतिक चाल से झुका ड्रैगन, मोदी की डिप्लोमेसी का कमाल
-------------------------------
-अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मन्त्री रहे स्वामी चिन्मयानंद मानते हैं कि सीमापवर्ती देशों से सख्ती के साथ कूटनीति में मोदी का कोई जवाब नहीl
-चीन को पहले डोकलम और फ़िर पूर्वी लद्दाख़ की सीमा पर बिना युद्ध की स्थिति आये भारत की बात माननी पड़ी, मोदी के तीसरे कार्यकाल में छद्म युद्ध भूल गया चीन l
--------------------------------
-कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
--------------------------------
नई दिल्ली/लखनऊ, (तहलका विशेष)l ये नया भारत है नरेंद्र मोदी का जो झुकता नहीं और न ही एक इंच पीछे हटता है l यह बात दुनिया की दूसरी आर्थिक महाशक्ति वाले देश चीन और उसके राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग को चार साल में तब समझ में आ गई जब पहले डोकलम में सेनाओं की झड़प और फ़िर पूर्वी लद्दाख़ सीमा पर चीन की तैनात सेना के जवाब में हमारी सेना भी जमी रहीl दोनों देशों में 'भारत की नीति राष्ट्रवादी रही और चीन की विस्तारवादी' से दुनिया वाक़िफ़ हैl बल्कि चीन की विस्तारवादी नीति से तमाम देश डरते भी हैं l वह पड़ोसी देशों की जमीन कब्जाने में छद्म रवैया यानी 10 कदम आगे बढ़ जाता है और समझौते की स्थित आने पर पांच कदम पीछे हट जाता है, यानी कब्जा की गई पांच कदम जमीन अपनी मानकर सीमा विस्तार कर लेता है l जबकि भारत खासकर नरेंद्र मोदी की सरकार 'युद्ध नहीं बुद्ध का देश है' के संदेश पर राष्ट्रवादी सोच के तहत देश की सुरक्षा को कटिबद्ध है, अर्थात हम किसी पर हमला करने की बजाय अपनी ऊर्जा का उपयोग आर्थिक विकास में लगाएंगे लेकिन देश पर आंच भी नहीं आने देंगे, अपनी एक इंच भूमि किसी को कब्जा नहीं करने देंगेl दोनों सीमाओं पर ड्रैगन के साथ जारी सरगर्मी पर विराम तब लग गया जब 21 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत के साथ चीन की सहमति 2020 से पूर्व की सीमा रेखा (एल ए सी) पर बन गई हैl यानी पूर्व की स्थिति बहाल करने पर सहमति बनी है l
इसी मुद्दे पर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मन्त्री रहे स्वामी चिन्मयानंद ने 'तहलका संवाद' से हुई अनौपचारिक बातचीत में कहा कि अटल जी उदारवादी होते हुए राष्ट्रवादी रहे, लेकिन मोदी देश की सुरक्षा के मामले में उनकी अपेक्षा सख्त हैं, बाबजूद इसके उन्होंने अपनी बेहतरीन डिप्लोमेसी के जरिये चीन को झुकाकर अपनी राष्ट्रवादी नीति का संदेश दुनिया को दे दिया, साथ ही देश के भीतर विपक्षी दल कांग्रेस का वह मुद्दा भी छीन लिया जिसे चीन के बहाने मोदी को जनता की नजर में कमजोर करने की कोशिश की जा रही थीl
स्वामी चिन्मयानंद बेबाक कहते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भी चीन लगातार प्रयास कर रहा था लेकिन असफल रहा l जब यही प्रक्रिया नरेंद्र मोदी की सरकार में अपनाया तो उसे सख्ती के साथ नये भारत के तेवर समझ में आ गए और मुँह की खानी पड़ी l
चिन्मयानंद कहते हैं कि मोदी ने जिस तरह पाकिस्तान को कहा था कि 'आतंकवाद और सामान्य सम्बन्ध' के लिए बातचीत साथ- साथ नहीं चल सकती है l ठीक उसी तर्ज पर चीन से भी कहा था कि 'सीमा विवाद और व्यापारिक व अन्य सम्बन्ध सामान्य' रखने को बातचीत नहीं की जा सकती है l पूर्वी लद्दाख के 'डेमचक और डेमसांग' सीमा पर दो ऐसे विंदु हैं जहाँ से पीछे हटने को चीन तैयार नहीं था l मामला ये था कि इन विंदुओं पर दोनों देशों की बड़ी संख्या में सेना की गश्त हो रही थी, इसी बीच चीन ने पेट्रोलिंग प्वाइंट को आचानक बन्द कर दिया तो भारत ने भी वैसा ही जवाब दिया, फ़िर तो स्थिति शीत युद्ध जैसी हो चली थीl भारत सेना बढ़ाने के साथ सीमा क्षेत्र में निर्माण कार्य भी तेजी से करता रहा, जिससे चीन की चिंता बढ़ने लगीl बाद में उसे समझ आया कि यह मोदी का नया भारत है, जो देश की सुरक्षा के लिए जिद पर अड़ा है l इसी के बाद वह अन्य सीमा विंदु के साथ इन दोनों विंदुओं से भी पीछे हटने को तैयार हो गया l मोदी के दस साल के कार्यकाल में चीन को दूसरी बार झुकना पड़ा है l यही भारत की कूटनीतिक और मोदी की सबसे बड़ी जीत है l
इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष खासतौर से कांग्रेस ने बड़ा शोर मचाया कि चीन के शी जिनपिंग से मोदी डर गए l इसी को मुद्दा बनाकर मोदी के खिलाफ विमर्श (नेरेटिव) गढ़ने की कोशिश भी जारी थी लेकिन सीमा विवाद पर हुए समझौते से विपक्ष का यह मुद्दा भी उनके हाथ से निकल गया l दूसरी ओर बिना युद्ध लड़े देश की इस जीत का असर भारतीय राजनीति पर भी पड़ेगाl विभिन्न प्रांतों में होने वाले विधान सभा चुनावों में भी इसका असर देखने को मिले तो हैरत की बात नहीं होनी चाहिए l







No comments: