ऑपरेशन यमराज: मरीजों की जिंदगी से खेल रहे डिग्री और गैर डिग्री वाले 'झोलाछाप'
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-नशे में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाओं की होती है तस्करी, स्वास्थ्य विभाग के मुखिया को पता ही नहीं, बड़े खेल कर रहे माताहतl
-बानगी जौनपुर की- नईगंज में एक मकान के दो तल पर दो नर्सिंग होम, फ़ायर सर्विस, पार्किंग, मेडिकल कचरा निस्तारण की व्यवस्था तक नहीं l
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-कैलाश सिंह-
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जौनपुर/लखनऊ, (तहलका विशेष)l पैसे के लिए आज़ इंसान ही इंसान को मार रहा है l कोरोना काल तो आपदा में अवसर के लिए मील का पत्थर बन गया, जाड़ा, गर्मी, बरसात की सीजनल बीमारियां जैसे इस समय डेंगू, वायरल आदि में मरीजों को डराकर उन्हें आर्थिक रूप से मोसम्बी की तरह निचोड़ लिया जा रहा है l केन्द्र और प्रदेश सरकारें आम जन जीवन को स्वस्थ रखने को चाहे जितनी व्यवस्था और सख्ती कर लें लेकिन अन्य तमाम विभागों की तरह 'नियम, मानक, कानून' का तोड़ माफ़िया स्वास्थ्य विभाग में भी निकाल लेते हैं l इसमें वह अफसरों और बड़े नौकरशाह तक को शामिल कर लेते हैं या उनके नाम पर धंधा करते हैं l
दरअसल सरकार की मंशा साफ़ है कि गरीबों को भी पांच लाख तक इलाज मुफ्त में मिले, इसीलिए आयुष्मान कार्ड की व्यवस्था दी गई लेकिन इसमें भी मेडिकल माफ़िया घुसकर कब्जा करते जा रहे हैं l जौनपुर की बानगी पर नज़र डालें तो यहाँ आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज भी दो तरह से होता है, एक तो सेटिंग के तहत कार्ड से सरकारी धन और मरीजों से उनकी जेब खाली कर ली जाती है, दूसरा तरीका वह बन गया है जिसे पहले स्थान पर होना चाहिए, यानी निजी अस्पतालों को इनके इलाज में दवा के साथ भोजन और पौष्टिक आहार तक की व्यवस्था होती हैl कुछ अस्पतालों में इस मानक को ध्यान में रखा जाता है, इस कारण वह किसी भी जांच पड़ताल से नहीं डरते l
जनपद की तहसीलों और उनकी छोटी बाजारों तक बगैर पंजीकृत अस्पतालों की भरमार है l केराकत में जिन हाई स्कूल फेल युवकों के रेफरल सेंटर का जिक्र पिछले एपिशोड में किया गया था वह भी महज बानगी है l ये तो छोलाछाप की निचली श्रेणी के स्लीपर सेल हैं जो मरीजों को बनारस, जौनपुर, भेजते हैं फ़िर इन्हीं मरीजों को डिग्रीधारी छोलाछाप मैदा सरीखे फेटते हैं l केराकत में जिस तरीके से कथित डिग्रीधारी झोलाछाप अपने रसूख के बलपर लूट मचाये हैं वही हाल शाहगंज, मछलीशहर, मदियाहूँ, बदलापुर की तरह प्रदेश के हर शहर और कस्बे का है जो इनकी गिरफ्त में हैं, इनका जिक्र अगली कड़ियों में मिलता रहेगाl साथ में जिला अस्पताल के डॉ अशोक यादव सरीखे अच्छे और ईमानदार चिकित्सकों की नज़ीर भी मिलेगी l
अब सवाल उठता है दवाओं की तस्करी, बेहतर इलाज का दावा करने वाले गुमटी और खोमचे वाले अस्पतालों की तो प्रदेश के हर शहर में ऐसे बड़े अड्डे और चिकित्सा माफ़िया मिलेंगे जैसे जौनपुर के नईगंज में हैं l यहाँ एक भवन के दो तल पर दो डॉक्टर प्रैक्टिस करते हैं l दलाल मरीजों को भेड़ की तरह बटोरते हैं l यहाँ न पार्किंग है और न ही फ़ायर सर्विस के लिए कोई स्थान है फ़िर ये 'एनओसी' पा लिए हैं l ये चिकित्सा माफ़िया की शरण में होते हैं, सरकार चाहे जिस पार्टी की हो इनपर कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि ये अपने हम जातीय पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को सटा लेते हैं l
मंगलवार 22 अक्टूबर को आगरा में नकली दवाएं बनाने, पैकिंग, एक्सपायरी व फार्मूला प्रिंट करने वाला जखीरा पकड़ा गया है, वहाँ से पूर्वांचल व बिहार आदि तक आपूर्ति होती रही है l जौनपुर में इसका मुख्य अड्डा नईगंज है l यहाँ तमाम निजी अस्पतालों के वाहन स्टैंड फोरलेन और हाईवे पर भी हैं, पुलिस को साटने पर हर धंधा बिंदास चलता है, बाकी अगली कड़ी में,,,, क्रमशः
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पुराने धंधे, नये कलेवर में-
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दिवाली नज़दीक है, जुए और पटाखे में पुलिस की पौ बारह खाद्य अप मिश्रण पकड़ने वालों की तरह होगी l सरकार को दिखाने के लिए कुछ कमजोर दबोचे जाएंगे, कुछ उन रेस्टोरेंट या दुकानों पर मिठाई की जांच होगी जो हफ्ता या महीना नहीं देते हैं l एक ट्रैवल संचालक जुवा की फड़ बन्द करके मसाज पार्लर के नाम पर 'गरम गोश्त' यानी देह का धंधा हम जातीय पुलिस वालों के बल पर मैहर मन्दिर के निकट चला रहा है l इनकी चौकड़ी का लीडर कथित पत्रकार किंतु दलाल है, वह जातीय संगठन के अलावा अपनी जाति के अफ़सरों को इसी धंधे के बल पर रिश्तेदार बना लेता है, बाकी शीघ्र,,,,, क्रमशः







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