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» »Unlabelled » बांग्लादेश के हिंदुओं ने सनातन संस्कृति को पुनर्जागृत कर दिया।Don News Express


 बांग्लादेश के हिंदुओं ने सनातन संस्कृति को पुनर्जागृत कर दिया

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-कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने देशहित से समझौता करने की बजाय खुद को निर्वासित करना मंजूर करके महा शक्तियों को कड़ा संदेश दिया और उन्हें सुरक्षित शरण भारत ने दी, वहां के हिंदुओं ने एकजुटता से अहिंसक आंदोलन के जरिए न सिर्फ अंतरिम सरकार को अपनी सुरक्षा देने के लिए बाध्य किया, बल्कि दुनिया को दशकों बाद बड़ा संदेश दिया l

-मरना ही है तो लड़कर मरो, इसी जज़्बे ने बांग्लादेश के हिंदुओं को एकता का रास्ता दिखाया और इस रास्ते ने आतताईयों का मनोबल तोड़ दिया, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मंशा के अनुरूप ऐसी ही हिंदू चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने चिंता जाहिर की थी l

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लखनऊ, (तहलका विशेष)l बांग्लादेश में एक हफ़्ते पूर्व छात्र आंदोलन के बहाने तख्ता पलटने वाले ज़मायते इस्लामी से जुड़े लोग जिस तरह हिंदुओं के नरसंहार, महिलाओं से बलात्कार और उनके धार्मिक स्थलों को लक्ष्य कर हमलावर थे उससे यही लग रहा था कि उस देश से भी अफ़ग़ानिस्तान आदि देशों की तरह हिंदुओं का नामोनिशान मिट जाएगा लेकिन वहां के हिंदुओं ने एकजुटता से अहिंसक आंदोलन करके दुनिया को बड़ा संदेश दिया और हिंदू चेतना को पुनर्जीवित कर दियाl शेख हसीना के जाने के बाद वहाँ की सेना के सहयोग से बनी अंतरिम सरकार को भी झुकने और सोचने को विवश कर दिया l

एक रिपोर्ट के मुताबिक आज़ादी के समय बांग्लादेश में वहाँ की कुल जनसंख्या के मुकाबले हिंदुओं की संख्या लगभग 33 फीसदी थी जो वर्तमान में घटकर 7.5 फीसदी रह गई थी,बीते पांच अगस्त से जारी नरसंहार में यह संख्या और घटने लगी एवं विश्व में मानवाधिकार के कथित हिमायती भी चुप्पी साधे रहेl जबकि तमाम देशों में हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों के विरोध प्रदर्शन ने बांग्लादेश में तिल -तिल कर मर रहे हिंदुओं के लिए टिमटिमाते दीपक की रोशनी में लड़कर मरने का जज़्बा पैदा कर दिया l इसी जज़्बे ने एकजुटता का रास्ता दिखाया l उन्होंने अहिंसक प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार करके वह कर दिखाया जो 1947 के बाद से अब तक न सुनाई दिया और न ही दिखाई दिया था l उनकी इसी एकता से भारत को भी उनके सहयोग के लिए रास्ता मिल गया l

स्वाधीन भारत में पाकिस्तान बंटवारे के बाद वर्ष 1950-51 में नेहरू- लियाकत पैक्ट (समझौता) हुआ था कि दोनों देश अपने यहाँ के अल्पसंख्यकों, भारत में मुस्लिम और पाकिस्तान  में हिंदुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन किया जाएगा, लेकिन पाकिस्तान ने अघोषित रूप से उसे तोड़ दिया जबकि भारत उस जिम्मेदारी को शिद्दत से निभाता रहा हैl पाकिस्तान हो या दुनिया के कुछ अन्य इस्लामिक देशों में हिंदुओं की घटती जनसंख्या में तीन प्रमुख तरीके इस्तेमाल किए जाते रहे हैं उनमें एक है धर्मांतरण, दूसरा हत्या और तीसरा पलायनl  इसका प्रमाण अफ़ग़ानिस्तान को मान सकते हैं l वह देश कभी भारत का ऐतिहासिक हिस्सा था, अब वहां हिंदू नहीं बचे हैं l पाकिस्तान उसी ढर्रे पर चल रहा है l वहां सर्वाधिक हिंदू बांग्लादेश वाले हिस्से में थे, उनकी प्रताड़ना को देखते हुए ही 1971 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने सेना के सहयोग से  पूर्वी पाकिस्तान के हिस्से में नए देश बांग्लादेश को दुनिया के मानचित्र पर स्थापित कराया था l आज़ फ़िर उसी बांग्लादेश के हिंदुओं का कत्ल होने लगा तो भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी आगे आए, उनके साथ विपक्षी दल आ गए, लेकिन दुनिया के सभी देश चुप्पी साधे रहे, जब वहां के हिंदुओं को लगा कि बांग्लादेश के हिंदुओं ने सनातन संस्कृति को पुनर्जागृत कर दिया

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-कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने देशहित से समझौता करने की बजाय खुद को निर्वासित करना मंजूर करके महा शक्तियों को कड़ा संदेश दिया और उन्हें सुरक्षित शरण भारत ने दी, वहां के हिंदुओं ने एकजुटता से अहिंसक आंदोलन के जरिए न सिर्फ अंतरिम सरकार को अपनी सुरक्षा देने के लिए बाध्य किया, बल्कि दुनिया को दशकों बाद बड़ा संदेश दिया l

-मरना ही है तो लड़कर मरो, इसी जज़्बे ने बांग्लादेश के हिंदुओं को एकता का रास्ता दिखाया और इस रास्ते ने आतताईयों का मनोबल तोड़ दिया, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मंशा के अनुरूप ऐसी ही हिंदू चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने चिंता जाहिर की थी l

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लखनऊ, (तहलका विशेष)l बांग्लादेश में एक हफ़्ते पूर्व छात्र आंदोलन के बहाने तख्ता पलटने वाले ज़मायते इस्लामी से जुड़े लोग जिस तरह हिंदुओं के नरसंहार, महिलाओं से बलात्कार और उनके धार्मिक स्थलों को लक्ष्य कर हमलावर थे उससे यही लग रहा था कि उस देश से भी अफ़ग़ानिस्तान आदि देशों की तरह हिंदुओं का नामोनिशान मिट जाएगा लेकिन वहां के हिंदुओं ने एकजुटता से अहिंसक आंदोलन करके दुनिया को बड़ा संदेश दिया और हिंदू चेतना को पुनर्जीवित कर दियाl शेख हसीना के जाने के बाद वहाँ की सेना के सहयोग से बनी अंतरिम सरकार को भी झुकने और सोचने को विवश कर दिया l

एक रिपोर्ट के मुताबिक आज़ादी के समय बांग्लादेश में वहाँ की कुल जनसंख्या के मुकाबले हिंदुओं की संख्या लगभग 33 फीसदी थी जो वर्तमान में घटकर 7.5 फीसदी रह गई थी,बीते पांच अगस्त से जारी नरसंहार में यह संख्या और घटने लगी एवं विश्व में मानवाधिकार के कथित हिमायती भी चुप्पी साधे रहेl जबकि तमाम देशों में हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों के विरोध प्रदर्शन ने बांग्लादेश में तिल -तिल कर मर रहे हिंदुओं के लिए टिमटिमाते दीपक की रोशनी में लड़कर मरने का जज़्बा पैदा कर दिया l इसी जज़्बे ने एकजुटता का रास्ता दिखाया l उन्होंने अहिंसक प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार करके वह कर दिखाया जो 1947 के बाद से अब तक न सुनाई दिया और न ही दिखाई दिया था l उनकी इसी एकता से भारत को भी उनके सहयोग के लिए रास्ता मिल गया l

स्वाधीन भारत में पाकिस्तान बंटवारे के बाद वर्ष 1950-51 में नेहरू- लियाकत पैक्ट (समझौता) हुआ था कि दोनों देश अपने यहाँ के अल्पसंख्यकों, भारत में मुस्लिम और पाकिस्तान  में हिंदुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन किया जाएगा, लेकिन पाकिस्तान ने अघोषित रूप से उसे तोड़ दिया जबकि भारत उस जिम्मेदारी को शिद्दत से निभाता रहा हैl पाकिस्तान हो या दुनिया के कुछ अन्य इस्लामिक देशों में हिंदुओं की घटती जनसंख्या में तीन प्रमुख तरीके इस्तेमाल किए जाते रहे हैं उनमें एक है धर्मांतरण, दूसरा हत्या और तीसरा पलायनl  इसका प्रमाण अफ़ग़ानिस्तान को मान सकते हैं l वह देश कभी भारत का ऐतिहासिक हिस्सा था, अब वहां हिंदू नहीं बचे हैं l पाकिस्तान उसी ढर्रे पर चल रहा है l वहां सर्वाधिक हिंदू बांग्लादेश वाले हिस्से में थे, उनकी प्रताड़ना को देखते हुए ही 1971 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने सेना के सहयोग से  पूर्वी पाकिस्तान के हिस्से में नए देश बांग्लादेश को दुनिया के मानचित्र पर स्थापित कराया था l आज़ फ़िर उसी बांग्लादेश के हिंदुओं का कत्ल होने लगा तो भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी आगे आए, उनके साथ विपक्षी दल आ गए, लेकिन दुनिया के सभी देश चुप्पी साधे रहे, जब वहां के हिंदुओं को लगा कि हम इसी तरह मिट जाएंगे तो उन्होंने लड़कर मरने का फैसला किया और खड़े हो गए सेना और आतताईयों के सामने, तब जाकर वहां की अंतरिम सरकार झुकी, माफ़ी मांगी और सुरक्षा का भरोसा दिया l

बांग्लादेश के हिंदुओं के इस कदम ने ही हिंदू चेतना को जागृत करने के साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काम कर दिया हैl उनकी इसी चेतना ने भारत समेत दुनिया के तमाम देशों को भी आगे आने का रास्ता बना दिया l विदित हो कि पांच अगस्त को बांग्लादेश में उपद्रव शुरू हुआ और उसके दो दिन बाद अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने इसी हिंदुत्व की चेतना को लेकर चिंता जाहिर की थी l इसी तरह मिट जाएंगे तो उन्होंने लड़कर मरने का फैसला किया और खड़े हो गए सेना और आतताईयों के सामने, तब जाकर वहां की अंतरिम सरकार झुकी, माफ़ी मांगी और सुरक्षा का भरोसा दिया l

बांग्लादेश के हिंदुओं के इस कदम ने ही हिंदू चेतना को जागृत करने के साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काम कर दिया हैl उनकी इसी चेतना ने भारत समेत दुनिया के तमाम देशों को भी आगे आने का रास्ता बना दिया l विदित हो कि पांच अगस्त को बांग्लादेश में उपद्रव शुरू हुआ और उसके दो दिन बाद अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने इसी हिंदुत्व की चेतना को लेकर चिंता जाहिर की थी l

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