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 खेल मंत्री गिरीश यादव ने अपने ही विस क्षेत्र में भाजपा से गेम कर दिया


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-लोस चुनाव 2024(73 जौनपुर)

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-सदर विधानसभा चुनाव 2017-22 में खुद जीते और नगर पालिका अध्यक्ष का टिकट मौर्य महिला को दिलाकर जिताया पर भाजपा को जब जरूरत जातीय वोटरों के लिए पड़ी तो मंत्री गिरीश यादव नहीं दिला पाए, इतना ही नहीं, पार्टी के कोर वोटरों में शुमार मौर्य वोटरों को भी सपा में जाने से नहीं रोक पाए l जबकि इनके भाई- भतीजा ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत सदस्य हैं l

-जिले की सभी विधानसभा सदर के अलावा, बदलापुर, शाहगंज, मुंगराबदशापुर में भी प्रतिनिनिधियों ने पार्टी की टांग खींची,यहाँ भी 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को जितने वोट मिले थे उससे कम वोट भाजपा के  लोक सभा प्रत्याशी को मिले, जबकि इस बार लगभग 25 हजार मतदाता बढ़े थे l  केवल मलहनी में भाजपा को पिछले चुनाव से ज्यादा वोट मिले l

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-कैलाश सिंह/एकलाख खान-

तहलका न्यूज नेटवर्क

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वाराणसी/जौनपुर l लोक सभा चुनाव 2024 में खासकर यूपी में भाजपा को पिछले दो चुनावों की अपेक्षा इस बार मिली करारी हार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने खुद की जिम्मेदारी ले ली, लेकिन संगठन के राष्ट्रीय स्तर पर चिंतन के बाद पार्टी में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं l कार्यवाही के दायरे में मंत्री और विधायक भी आएंगे l यह दीगर है कि उनपर इस हार की गाज़ विलम्ब से गिरेगी l यदि ऐसा होगा तो प्रदेश में पहले नम्बर पर जौनपुर जनपद होगा, जहां खेल मंत्री गिरीश यादव टॉप पर होंगेl इसके अलावा राज्यसभा सदस्य सीमा दिवेदी, ब्लॉक प्रमुख फंटू सिंह, विधायकगण रमेश मिश्र, रमेश सिंह भी दायरे में आएंगे l हालांकि रमेश सिंह निषाद पार्टी के शाहगंज से विधायक हैं l कार्यवाही के दायरे में पहले नम्बर पर फिलहाल पार्टी के जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह हैं लेकिन मंत्री सबसे हिट लिस्ट में हैं l

भाजपा ने जिस समीकरण के साथ सोशल इंजीनियरिंग के तहत 2017 के विधानसभा चुनाव में गिरीश चंद्र यादव को टिकट दिया और जीतने के बाद उन्हें शहरी निकाय मंत्री बनाया तो जिले के लोगों को लगा की अपना शहर अपग्रेड हो जाएगा लेकिन वह ' सबका साथ- सबका विकास' की बजाय अपना ही विकास कर लिए l 2022 में पार्टी इन्हें टिकट की कतार से बाहर मानकर चल रही थी इसी बीच स्वामी प्रसाद मौर्य ने बगावत कर दी तो मजबूत पिछड़े के नाम पर इनके खिलाफ शिकायतों को दर किनार करते हुए टिकट दिया लेकिन खेल मन्त्रालय देकर सरकार ने खेल कर दिया l 

 लोक सभा चुनाव को बिगुल बजा तो मंत्री गिरीश भी टिकट के आवेदकों में रहे l जब पार्टी हाई कमान अमित शाह ने कांग्रेस में रहे कृपाशंकर सिंह को मुंबई से लाकर 73 लोक सभा क्षेत्र  जौनपुर का प्रत्याशी बनाया तो सबसे ज्यादा खराब मंत्री को लगा l परिणाम स्वरूप चुनाव प्रचार में यह केवल दिखावे में लगे रहे और लोगों से मुंबई की कटिंग चाय वाले इशारे में वोट मांगते रहे l नतीजा आया तो लगभग साढ़े तीन हजार वोट विस चुनाव की अपेक्षा सदर सीट से कम मिले और यहां से लोस प्रत्याशी को 22 हजार से अधिक मतों से हार मिली l 

इसी प्रकार लगभग सात हजार वोट बदलापुर विधानसभा से लोस प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह को कम मिला, हार तो अधिक वोटों से हुई l यहाँ से लगातार दो बार से रमेश मिश्र विधायक हैं जबकि बढ़े वोटों को शामिल नहीं किया गया है l यह भी प्रचार कम और दिखावा ज्यादा किए l 

शाहगंज विधानसभा से भी 2022 के विस चुनाव के मुकाबले 1744 वोट लोस प्रत्याशी को कम मिला, यहाँ भी बड़ी हार मिली और बढ़े वोटरों को नहीं जोड़ा गया l यहाँ के विधायक रमेश सिंह एनडीए सहयोगी निषाद पार्टी से जीते हैं लेकिन इसी क्षेत्र के मूल निवासी हैं भाजपा जिलाध्यक्ष पुष्प राज सिंह l इन लोगों ने कितनी मेहनत की उसकी गवाही परिणाम दे रहा है l मुंगरा बादशाहपुर विस क्षेत्र से पूर्व विधायक रहीं सीमा दिवेदी  अब राज्य सभा से सांसद हैं l इनके साथ पूर्व विधायक दिवंगत विनोद सिंह के पुत्र फंटू सिंह ने भी कमान संभाली थी, प्रत्याशी की ओर से मंत्री की तरह इन दोनों ने खर्च भी लाखों में किए लेकिन 2022 विस चुनाव में भाजपा को मिले वोटों से 5746 वोट कम मिले l बढ़े वोटों की गिनती यहाँ भी नहीं की गई है l शाहगंज व सदर सीटों पर सुभासपा और अपना दल का असर कम होने से अदर बैकवर्ड वोट भी सपा की तरफ़ खिसक गए l

विधानसभा चुनाव 2022 में मलहनी विस क्षेत्र एक अकेला ऐसा निकला निकला जो यादव बहुल मतदाता वाली सीट है फिर भी यहाँ से लोस प्रत्याशी को 55 000 से अधिक वोट 2022 की अपेक्षा मिले, हालांकि यहाँ से भी अधिक वोट के आंकड़े से भाजपा  को हार मिली l गनीमत इसलिए हो गई क्योंकि चुनाव से हफ्ते भर पूर्व श्रीकला सिंह का टिकट कटने के बाद पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने भाजपा को समर्थन देते हुए खुद प्रचार में निकल गए थे l यही कारण है कि इस सीट पर 2022 में भाजपा प्रत्याशी को कुल 18 हजार वोट हासिल हुए थे लेकिन इस बार श्रीकला के मैदान से हटने और धनंजय के समर्थन ने उसमें 55 हजार वोटों का इजाफ़ा हुआ है l

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