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» »Unlabelled » कहीं विपक्ष जन आंदोलन की तैयारी तो नहीं कर रहा? -Don News Express

 कहीं विपक्ष जन आंदोलन की तैयारी तो नहीं कर रहा? 

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-पी एम की वराणसी सीट जीत के अंतर को लेकर फंसी, यहाँ इंडिया गठबंधन की मोहब्बत की दुकान जमकर चली l

-इस बार चुनाव में मोदी का हर दांव पड़ा उल्टा, वह 30 मई के बाद जाएंगे मेडिटेशन पर, इंडिया गठबंधन की बैठक एक जून को l

-एक जून को ही आखिरी सातवें फेज़ का देश की 57 सीटों के लिए होगा मतदान, अब दोनों गठबंधन अगली तैयारी में l

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कैलाश सिंह/अशोक सिंह/एकलाख खान

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वाराणसी/नई दिल्ली/गाज़ीपुर l

देश में सात फेज़ में हो रहे लोकसभा चुनाव के आखिरी फेज़ में 57 सीटों के लिए आज़ शाम 5 बजे प्रचार बन्द हो गया l एक जून को वोट पड़ेंगे और चार को गिनती होगी l इससे पहले ही पीएम मोदी ने मेडिटेशन में जाने की घोषणा कर दी, अब वह चार जून को ही अवतरित होंगे l विपक्ष भी काउंटिंग से पूर्व एक को मतदान के दिन दिल्ली में घटक दलों के साथ बैठक आयोजित कर दिया है l अब राजनीतिक विश्लेषक इनके अलग -अलग मायने निकाल रहे हैं l

देश की सबसे वीआईपी सीट वाराणसी में इंडिया गठबंधन की युवा जोड़ी राहुल गाँधी- अखिलेश यादव और प्रियंका गाँधी ने यहाँ आकर रोड शो के जरिए संदेश दिया कि नफ़रत के मुकाबले मोहब्बत भारी है l दरअसल इस दुकान में पहले एक प्रोडक्ट 'मुस्लिम वोट बैंक' था लेकिन राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा ने पिछड़ा, अति पिछड़ा, आदिवासी, दलित और एनडीए से नाराज़ कुछ सवर्णों को खींचकर ला दिया l इस बार मोदी लहर नहीं चली, राम मन्दिर मुद्दा नहीं बन पाया और अयोध्या की ही सीट फंस गई l इनके हर मुद्दे को पलटकर राहुल गाँधी ने अपना बना लिया, जैसे संविधान बचाओ, आरक्षण बचाओ आदि l इसी के साथ राहुल गाँधी एक परिपक्व नेता के रूप में ही नहीं, बल्कि बेहतरीन संगठन बनाने की क्षमता को भी कर दिखाया l

 इंडिया गठबंधन की बढ़ती ताकत का ही कमाल है कि वाराणसी सीट पर चुनाव में जीत का अंतर पिछले दो चुनावों के बराबर बनाए रखने के लिए भाजपा के तमाम बड़े नेताओं, कई सीएम ने आकर डेरा डाल दिया था l कांग्रेस जहाँ लोगों को जोड़ने में लगी थी वहीं भाजपा के चाणक्य अपने ही नेताओं और उनके वोट बैंकों को तोड़ने में लगे रहे l यही कारण था की 2004 की तरह इस बार भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपने हाथ खींच लिये l परिणाम स्वरूप  प्रधान मन्त्री की सीट पर जीत का अंतर बनाए रखने के लिए पार्टी के सभी बड़े नेताओं को लगना पड़ा l आज़ स्थिति यह दिख रही है कि वाराणसी के अलावा चन्दौली और गोरखपुर की सीट किसी तरह निकल जाए तो बड़ी बात है, क्योंकि इन दोनों सीटों पर सवर्णों में खासकर ठाकुर और ब्राहमन पूरी ताकत से लग गए हैं, बाकी सीटें करीब से फंसी हैं l कई सीटों पर तो भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी के प्रत्याशियों को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं l हाल ही में मोदी का एक बयान की फिल्म के जरिये लोग गाँधी को जान पाए! यह भी हास्यास्पद आमजन तक को लग रहा है जबकि यहाँ की हर नोंट पर गाँधी दिखते हैं l

दिल्ली में इंडिया गठबंधन की एक को होने वाली बैठक में वोटों की गिनती में घपला रोकने को देशभर में जादुई आकड़े वाली सीटों पर सभी सहयोगी अपनी टास्क फोर्स लगाएंगे l क्योंकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति से ही विपक्ष को शक बढ़ा दिया l जरा भी गड़बड़ी लगी तो वह अपने आंदोलन को जन आंदोलन में उसी तरह बदलेंगे जिस तरह वोटिंग में जनता को चुनाव लड़ने के लिए सामने ला दिया l निर्वाचन आयोग की ताकत क्या है? उसका एहसास मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे टी एन शेषन ने तीन दशक पूर्व करा दिया था l जौनपुर में 25 को मतदान की देर शाम पूर्वांचल विवि के पास रिज़र्व ईवीएम को वाहन समेत विपक्षियों ने पकड़ लिया तो निर्वाचन अधिकारी ने गलती से इधर आने की बात कही लेकिन पकड़ने वालों पर मुकदमा भी करा दिया l इस तरह देखें तो देश भर में आत्म विश्वास से भरा विपक्ष किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए सतर्क है l वह और एलर्ट इसलिए भी है क्योंकि निर्वाचन के ही दौरान तमाम ट्रांसफर, पोस्टिंग और सेवा विस्तार की घटनाएं कुछ बड़ा होने का उनके संदेह को बढ़ा रही हैं l

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