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 भू- माफिया एपिसोड 4: ग्राम पंचायत की ज़मीन पर दो लोग एक- दूजे को बना रहे हैं 'भू-माफिया'! 

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कैलाश सिंह-

विशेष संवाददाता

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लखनऊ/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l चार साल पूर्व हमने सोशल मीडिया पर जब 'माफिया के बदलते स्वरूप' की टैग लाइन पर भू- माफिया को लेकर सीरीज चलाई थी तब यह अनुमान भी नहीं था कि इसका दायरा बड़ा होगा, और लोग खुद एक- दूसरे पर भू- माफिया होने की तोहमत लगाएंगे, हालांकि उस दौरान जौनपुर शहर की पूर्व में प्रस्तावित झील से जुड़ी फाइलों की धूल झाड़कर जिला प्रशासन ने लगभग 16 सौ लोगों को नोटिस भेजा था, आखिर में पता चला कि जिन जमीनों पर लोग काबिज हैं उसकी 'नवैयत' भवन बनाने, व्यवसाय करने के लिए नहीं है फ़िर भी मास्टर प्लान की मिलीभगत से बनवाये मानचित्र पर सुपर मार्केट खड़ी हो गई, लोग हर साल लाखों रुपये खर्चकर काबिज हैंl 

आज़ भू- माफिया का दायरा इतना बढ़ गया है कि अब जिला ही नहीं, प्रदेश का कोई कोना इससे अछूता नज़र नहीं आ रहा हैl इन दिनों पब्लिक के लोग एक- दूजे पर 'भू- माफिया' होने के आरोप मढ़ रहे हैंl 

अब हमारे डिजिटल प्लेटफार्म पर दोबारा शुरू हुए इस एपिसोड में ऐसे प्रकरण की विस्तार से जानकारी आगे मिलती रहेगी, लेकिन इससे पूर्व 'ज़मीन' के बारे में जान लीजिए कि जो लोग इसके लिए लड़ते हैं उन्हें वही भूमि नसीब नहीं होती हैl इसके उदाहरण भी पांच हजार साल पूर्व हुए 'महाभारत' से ले सकते हैंl तब कौरवों ने पाण्डव को 'पांच गांव' भी देने से इनकार किया था तो 'कुरु क्षेत्र' में समूचा कुनबा निबट गया, इससे पूर्व काल से देश का नाम 'भारत' थाl जब मुगल आये तो हमारे देश को हिंदुस्तान कहा जाने लगाl इसका दायरा सिमटा फ़िर भी आज के अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि इसी का हिस्सा रहे, खैर हिंदुस्तान के आखिरी बादशाह 'बहादुर शाह ज़फ़र' का जिक्र वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय सिपाहियों के नेतृत्वकर्ता के तौर पर इतिहास में दर्ज हैl वह उर्दू के बेहतरीन शायर भी थे, उन्हें भी अंतकाल में दो गज़ ज़मीन मयस्सर नहीं हुई, जिसका जिक्र उन्होंने अपने शे'र में किया है-

'कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें, इतनी जगह कहाँ है दिल- ए- दाग़- दार मेंl

कितना है बद- नसीब 'ज़फ़र' दफ़न के लिए, दो गज़ ज़मीं भी न मिली कू- ए- यार मेंl'

इसके बाद अग्रेजी शासन काल आया तो इंडस नदी के नाम पर भारत का नाम इंडिया पड़ा लेकिन उन्हें भी यह सरजमीं छोड़कर जाना पड़ा, पर वह इसके कई टुकड़े कर गएl

जौनपुर में भूमि कब्जा और आरोप की बानगी: शहर के उत्तरी छोर पर सिद्दिकपुर गांव की ज़मीन लुम्बिनी- दुद्धी राजमार्ग पर हैl यहां की ज़मीन पर कबीर मठ से जुड़े व्यक्ति द्वारा विद्यालय चलाये जाने की चर्चा आम है, बाद में आज से ढाई दशक पूर्व इसी ग्राम पंचायत की ज़मीन के काफी हिस्से पर 'सीबीएसई' बोर्ड का विद्यालय 'मां दुर्गा जी' के नाम से स्थापित हुआl विद्यालय प्रबन्धन ने तत्कालीन प्रधान से ज़मीन पर कब्जा इस शर्त पर लिया कि हम इसके बदले दूसरी ज़मीन दे देंगे, लेकिन ज़मीन की 'नवैयत' का पेंच ऐसा फंसा कि मामला हाईकोर्ट तक पहुँच गयाl कोर्ट की अवमानना से बचने को जिला प्रशासन ने विद्यालय प्रबन्धन के खिलाफ जारी नोटिस के तहत ज़मीन के उपभोग की एवज में एक करोड़ का जुर्माना और बेदखली का आदेश सदर तहसीलदार के जरिये कर दियाl अब दोनों पक्ष एक- दूजे को भू- माफिया साबित करने पर तुला हैl

इसी तरह का प्रकरण प्रतापगंज के एक डिग्री कॉलेज का वर्षों से चल रहा है, इसमें भी पिछले साल सदर तहसीलदार ने एक करोड़ से अधिक जुर्माना और बेदखली का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक ग्राम पंचायत को न ज़मीन मिली और न ही जुर्माना की राशिl ये है प्रशासनिक कार्यवाही की रफ़्तारl इधर तीन दिन से शाहगंज क्षेत्र के एक 'माननीय' पर भू- माफिया होने की तोहमत पीड़ित व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से लगा रहा हैl,,,,,,,,, क्रमशः

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