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 यूपी में क्रूर और शर्मनाक 'मेडिकल अपराध' इस तरह होता है दफ़न! 

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-चिकित्सकीय पेशे में 'धन- धर्म और जिंदगी' से होने वाले खेल भुक्तभोगी परिवार के रोंगटे खड़े कर देते हैंl इस तरह के खेल तो हर दिन प्रदेश के किसी न किसी जिले होता ही है, लेकिन पैसे के बल पर उसे दबा दिया जाता हैl इस एपिशोड में बानगी जौनपुर की है जिसे हिन्दी साहित्य के छायावाद की विधा से समझा जा सकता है, क्योंकि इस मामले में पीड़ित के परिजन चुप्पी साध लिए हैंl

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कैलाश सिंह-

विशेष संवाददाता 

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जौनपुर/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l इस विशेष रपट समझने के लिए पहले एक किंवदंती की जानकारी जरूरी हैl 19 वीं शताब्दी में एक जमींदार अपने चलने के लिए घोड़ी लेने सौदागर के पास पहुंचा, पसंद घोड़ी का सौदा तय होने के बाद जमींदार ने सौदागर से पूछा - इतनी अच्छी नस्ल होने के बावजूद दाम क्यों कम लगाया? तब सौदागर ने बताया कि घोड़ी पानी देखते ही बिदक कर पीछे हो जाती हैl ये आदत उसे अपनी नानी से मिली हैl जमींदार इसे मामूली कमी मानकर सवार हुआ और सरपट घर पहुँच गयाl दिन, महीने, साल बीतते गए और वह ऐसी घोड़ी पाकर बहुत प्रसन्न रहाl 

दरअसल यह कहानी जमींदार की घोड़ी और बेटे की नस्ल से ही जुड़ी है, जिसमें नस्ल (संस्कार) ही उसके विनाश का कारण बनाl खैर, जमींदार ने अपने बेटे को बड़े शहर के महंगे स्कूल में मोटी फीस (डोनेशन) देकर बड़ा वैद्य यानी वर्तमान समय का चिकित्सक बना दियाl जब वह पढाई पूरी कर घर लौटा तो घोड़ी पर फ़िदा हो गयाl उसने घुडसवारी सीख ली और फ़िर घोड़ी पर घूमते हुए अपने पिता से मिली 'इश्क मिज़ाजी' की विरासत के तहत आसपास की युवतियों पर डोरे डालने लगाl कई घटनाओं में उसे थाने और पंचायत के भी चक्कर लगाने पड़े थेl समझौते में पैसे उसके पिता को चुकाने पड़े, हालांकि अवैध और अकूत कमाई के चलते पिता की सेहत पर कभी फर्क नहीं पड़ाl

एक दिन वह युवा चिकित्सक घूमते हुए पास के जंगल में पहुँच गया, वहां एक राजकुमारी पर उसकी नज़र पड़ी तो वह उसे देखता रह गयाl जब वह थोड़ा चैतन्य हुआ तो अपनी घोड़ी पर भरोसा करते हुए राजकुमारी को भगा लिया, इस बीच राजकुमारी की खोज में लगे घुडसवार सैनिक पीछा किये लेकिन युवक की घोड़ी को नहीं छू पाए, काफी दूर जाने पर अचानक नदी के पानी को देखते ही घोड़ी बिदक कर खड़ी हो गई, तब तक पीछा करने वाले सैनिकों ने आकर उसे पकड़ लिया और राजा के सामने पेश कियाl दरबार सजा और राजा ने युवक से पूछा तुम कैसे पकड़ में आये, जबकि मेरे घुडसवार तो तुम्हारी घोड़ी से बहुत पीछे थे, युवक का जवाब था कि मेरी घोड़ी नदी का पानी देखकर डर कर वहीं खड़ी हो गई तब मैं पकड़ा गया, राजा ने कहा, ओह..नस्लीय मामले में फंस गए, राजा ने कहा, यही स्थिति तो राजकुमारी की है, क्योंकि इसकी मां यानी रानी को मैं भी भगाकर लाया थाl 

हमारी रपट में चिकित्सा जगत से जुड़ी उपर्युक्त कहानी का नस्लीय अंश ही प्रमुख रूप से मेल खाता हैl एक युवा चिकित्सक का दिल अपनी उस नर्स पर भी आ गया जो पहले से व्याहता है और उसका पति भी उसी अस्पताल में कर्मचारी है, उसे गोली इसलिए मारी गई क्योंकि उसने अपनी पत्नी से हो रही छेड़छाड़ का विरोध किया था,,, शेष अगले एपिशोड में- क्रमशः

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