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 भू- माफिया एपिशोड-1

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झील में अनहोनी हुई तो फंसेंगे जौनपुर के प्रशासनिक अफ़सर भी!

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-मास्टर प्लान विभाग और प्रशासन के पांच दशक में नक्शा पास करने वाले कर्मी और अफ़सर नामजद के दायरे आने से नहीं बच सकते हैं, जिले में तैनात तत्कालीन नौकारशाहों पर भी आंच आये तो हैरत नहीं होगीl

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कैलाश सिंह-

विशेष संवाददाता

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जौनपुर/लखनऊ(तहलका संवाद न्यूज नेटवर्क) l उत्तराखंड के उत्तर काशी स्थित धराली गांव कहें या कस्बा अथवा पहाड़ों की तलहटी में बसा शहर, जो भी नाम देना चाहें दे सकते हैं क्योंकि ये इलाका अब तलहटी में दफ़न होकर इतिहास बन चुका हैl इसका उदय लगभग छह दशक पूर्व 1968 में फटे बादल से आये सैलाब द्वारा निर्मित समतल जमीन से हुआ था, तब वहां बसने वाले दोबारा ऐसी आपदा की संभावना को नकार चुके थेl ठीक ऐसे ही 'जल सैलाब' को नकार चुके जौनपुर की झील में बसे लोग भी ऊँचे टावर खड़े करके अस्पताल, दुकान, होटल, मॉल शॉप, शिक्षा संस्थान, बैंक आदि खोल लिए हैंl यदि पिज्जा रेस्टोरेंट सरीखे भवन धराशाई हुए और उसमें दबकर दहाई में जनहानि हुई तो प्रदेश की राजधानी तक हड़कम्प मचने से इनकार नहीं किया जा सकता हैl विगत सात अगस्त को हुई बारिश में ढही पिज्जा रेस्टोरेंट की दीवार ने वहां से गुजरते लोगों के रोंगटे खड़े कर दियेl घटना का वीडियो संलग्न हैl

स्टोरी का बैक ग्राउंड:-जौनपुर में वर्ष 1978- 80 के सितम्बर महीने में आई बाढ़ की त्रासदी झेलने वाले अधिकतर बुजुर्ग तो गुजर गए लेकिन बालक, तरुण और युवक जो आज बुजुर्ग हो रहे हैं वह भी उसे याद कर सिहर जाते हैं l उसी दौरान वाजिदपुर, जेसीज चौराहा होते हुए गोमती किनारे तक यह खाली जमीन नक्शे में झील के रूप चर्चित हुईl गोमती नदी के शाही पुल के ऊपर से गुजरी बाढ़ ने प्रतिनिधियों की तंद्रा भंग की तो सरकार ने शास्त्री पुल बनवायाl उसी दौरान पालिटेकनिक चौराहे से वाजिदपुर जेसीज होते हुए दुद्धी- लुम्बिनी मार्ग का बाईपास बना जो अब गोरखपुर- प्रयागराज  के फोरलेन में शामिल हो गया हैl 

झील और चाँदमारी:दरअसल अब से तीन दशक पूर्व बल्कि पांच दशक मानिए तब से चाँदमारी जहां पुलिस की राइफल शूटिंग होती थी वहां अब घनी आबादी हो चुकी हैl यहां प्रशासन की मिलीभगत से भू- माफिया की बाज़ नज़र झील पर गड़ी तो यह तालाब बनकर रह गई l सड़क पार बहुमंजिले सिटी टावर मालिकों ने तो 'भैंसा नाला को समेटकर बकरी नाला' बना दियाl विदित रहे कि इसी नाले से  लगभग 12 किलोमीटर दूर  दक्षिण में 'सई नदी' के उत्तरी छोर वाले गांवों का बरसाती पानी झील में आकर गिरता था और इसके भरने के बाद गोमती में खुले स्थानों से होकर पहुँचता थाl जब गंगा में बाढ़ आती है तब गोमती का पानी पीछे लौटता है जो जौनपुर में 'जल सैलाब' का कारण बनता हैl 

दिलचस्प ये है कि इस आपदा को बुलावा देने वाले भू - माफिया सामान्य ही नहीं हैं, इनमें से एक राजनीतिक दल के पूर्व मंत्री ने अपनी विधायक निधि से झील के नाले को संकरा करके उसके ऊपर रैन बसेरा बनवाया, जब संसद में पहुंचे तब उसे अपना आफिस बना लिया और फ़िर जब प्रदेश में शिक्षा मन्त्री बने तो उसे आवास का दर्जा दे दिये, (यह दीगर है कि शिक्षा से उनका कोई लेनादेना नहीं था)अब उसी परंपरा को उनका विधायक पुत्र कायम किए हैl 

वाजिदपुर में झील का कोना:  यहां पहले एक दुकान बनी फिर इसे बहुमंजिला कर दिया गया, जिस होटल के पिज्जा रेस्टोरेंट की दीवार भहराई है उसके नीचे से 'भैंसा नाला' को रास्ता दिया गया है l इसी इंजीनियरिंग का पालन उसके आगे उत्तर दिशा में एक मैरेज लॉन से होटल में तब्दील हुई इमारत के मालिकों ने भी किया, उसके आगे एक चिकित्सक ने अपने अस्पताल के आगे पुल बनवाकर नाले को पहले वाले साइज में भरपूर स्थान दिया लेकिन उसके बाद दिवंगत मुख्तार अंसारी का गुर्गा और माफिया रहे मुन्ना बजरंगी के आर्थिक पार्टनर ने 'भैसा नाले को फ़िर बकरी नाला' बना दियाl यह वही बहुरूपिया है जो वक्त पर सत्ताधारी दलों में पलटी मारकर अपनी अवैध सम्पति बचाता हैl यह व्यवसायी होने के साथ गाहे -ब- बगाहे पत्रकार भी बना रहता हैl इन दिनों अपने बेटे के लिए लखनऊ के एक फाइल कापी वाले अखबार का ब्यूरो विहीन 'ब्यूरो चीफ' का पद खरीद लिया हैl इसके प्रचार के लिए शहर के विभिन्न इलाकों में राजनीतिक दलों की तरह बड़ी- बड़ी होर्डिंग भी लगवा दिया हैl इस तरह का प्रयोग किसी प्रोफेशनल पत्रकार के लिए पहली बार देखने को मिल रहा हैl अब अगली कड़ी में,,,,, क्रमशः

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