देश में जातिवादी राजनीति करने वालों के चेहरे से उतरने लगा है नकाब
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-यूपी में जातिवादी राजनीति करने वाले दलों सपा और कांग्रेस के बीच मुस्लिम वोट बैंक के मुद्दे पर फंसेगा पेच, आगामी विधान सभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर गठबंधन चलना कठिनl दलित फिर लौटेंगे बसपा और बाकी भाजपा में l
-पीएम नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की अपदस्थ पीएम शेख हसीना को शरण देकर जातिवादी चक्रव्यूह को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तोड़ दिया तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सनातन संस्कृति को मजबूत करने में सफल हो रहे, इसका प्रमाण बांग्लादेश के हिंदुओं ने दिया l
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-कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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नई दिल्ली/लखनऊ, (तहलका विशेष)l बीते लोकसभा चुनाव के दौरान देश में जातिवादी राजनीति का कुरुक्षेत्र बना उत्तर प्रदेश ही आगामी विधान सभा चुनाव 2027 तक कांग्रेस और सपा के गठबंधन के टूटने या बने रहने का गवाह बनेगाl इससे पूर्व मध्य प्रदेश में सीटों को लेकर दोनों में तनातनी हो चुकी है और इस समय हरियाणा में इसी मुद्दे पर शीत युद्ध जारी है, लेकिन यूपी में राहुल गाँधी और अखिलेश यादव के बीच समझौता बनाए रखने या तोड़ने, दोनों स्थितियों में उनके लिए खतरा बरकरार रहेगाl राहुल गाँधी जहाँ जातिगत जनगणना को लेकर एग्रेसिव रहते हैं वहीं अखिलेश यादव ने पीडीए के जरिए बता दिया कि वह जातिगत राजनीति पर ही निर्भर हैं l
विगत लोकसभा चुनाव में खासकर उत्तर प्रदेश की 37 सीटें सपा और 'छह सीटें कांग्रेस को मिल गई तो दोनों को लगा कि उनका झूठा विमर्श-'संविधान बदलने और आरक्षण खत्म किए जाने' के मुद्दे पर दलितों, मुस्लिमों और अदर्स बैकवर्ड का वोट मिला है, जबकि हुआ यह कि दलित और मुस्लिम का वोट केन्द्र में भाजपा से लड़ने में राहुल गाँधी को सक्षम मानकर कांग्रेस को मिला था l विधान सभा चुनावों में मुस्लिम वोटर भाजपा को हराने के लिए सपा और बसपा को देता रहा है l उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ बसपा भी कमजोर पड़ी तो मुस्लिम पूरी तरह सपा के साथ खड़े नज़र आये, फिर भी भाजपा की योगी सरकार बनी, कारण सपा को दलित व अन्य वर्गों का वोट नहीं मिला यानी यह पार्टी केवल यादव, मुस्लिम के सहारे सत्ता तक नहीं पहुँच सकती l अब तो फिर से दलित राजनीति को मजबूत करने में बसपा सुप्रीमों मायावती सक्रिय हो गई हैं l
यूपी में विधान सभा चुनाव 2027 के मद्देनज़र अपने को मजबूत करने के लिए कांग्रेस 50 फीसदी सीटों पर समझौता करने का मन बना रही है जबकि सपा उसे 100 सीटों के नीचे रखने का मंसूबा पाले हुए हैl दोनों दलों के सूत्र यह भी बताते हैं कि सीटों के बंटवारे को लेकर राहुल गाँधी और अखिलेश यादव के 'सपने' आपस में टकराएंगे क्योंकि दोनों मुस्लिम वोट बैंक को अपना मान रहे हैं l एक का सपना है पार्टी को अस्तित्व में लाना और दूसरे का लक्ष्य है फ़िर सत्ता में लौटनाl
इधर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा की मंशा के मद्देनज़र मुख्यमंत्री व गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ सनातन संस्कृति- धर्म को आगे बढ़ाते हुए बंटे हिंदुओं को एक करने के साथ जातिवादी मानसिकता को तोड़ रहे हैं, वहीं पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्रवाद के पैमाने पर देश- विदेश में जातीय राजनीति के चक्रव्यूह को ध्वस्त करने में लगे हैं l इसकी बानगी बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के दौरान से चल रही घटनाओं से निरंतर मिल रही है l जबकि बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल की घटनाओं में चुप्पी साधने वाले यही राहुल गाँधी व अखिलेश यादव अयोध्या और कन्नौज की पीड़ित महिलाओं की बजाय आरोपियों के पक्ष में खड़े नज़र आए l इन दिनों यूपी पुलिस द्वारा कथित एनकाउंटर में मारे जा रहे कथित किन्तु जातिगत अपराधियों को लेकर बयान दे रहे हैं l ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और प्रयागराज में नकली नोटों, असलहों और ऐसे नोट छापने की मशीन के साथ पकड़े गए लोगों का सम्बन्ध सपा से जुड़े होने का सामने आ रहा है, अब इसमें भी अखिलेश यादव का आने वाला बयान उनकी राजनीतिक दिशा को उजागर करेगा l
राजनीतिक गलियारे में चल रही इन चर्चाओं को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव ने राहुल गाँधी के रूप में उस कांग्रेस रूपी शेर की सवारी कर ली है जिससे उतरने या बैठे रहने दोनों ही स्थितियों में उनके लिए खतरा बना रहेगा l







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