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 पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी 'जन आंदोलन के सामने नतमस्तक, केजरीवाल कुर्सी छोड़ विमर्श खोज रहे


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-आंदोलन रूपी जिस राजनीतिक हथियार के बल पर पश्चिम बंगाल की सत्ता में ममता बनर्जी आईं वही हथियार जब जनता ने इस्तेमाल किया तो उन्हें पराजित योद्धा सरीखे झुकना पड़ा l

-दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने संवैधानिक पद पर रहते हुए नैतिकता को 'ताक' पर रखा तो उनके हाथ से ईमानदारी फिसल गई, अब उसी की तलाश और इंतज़ार में सीएम पद से इस्तीफा देकर विमर्श गढ़ रहे l

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-कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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कोलकाता/नई दिल्ली, (तहलका विशेष)l माना जाता है कि पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ किया जाने वाला कोई भी कार्य व्यक्ति या समूह के आत्मविश्वास को शिखर पर पहुंचा देता है, फिर उसके सामने पहाड़ बौना होता है और ताकत भी निरीह नज़र आती है l ऐसा वाकया पहली बार देश के पश्चिम बंगाल  में देखने को मिल रहा है l राज्य सरकार रूपी पहाड़ को बौना करने वाला आत्मविश्वास यहां के जूनियर डॉक्टरों में आम जनता के समर्थन ने पैदा किया और जो सीएम ममता बनर्जी केन्द्र की मोदी सरकार के आगे नहीं झुकीं अब वही, जनतंत्र के सामने पराजित योद्धा सरीखी 'निरीह' दिख रही हैं l 

हालांकि उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को नौकरी समेत बहुतायत डर दिखाया लेकिन आंदोलनरत चिकित्सक 'निज हित की बजाय सामूहिक हित' को तरजीह दिए तो हर आम और खास ने उनका साथ देकर इतनी ताकत बढ़ा दी कि उनके सामने ममता बनर्जी को अपने इस्तीफे की पेशकश तक करने की बात बोलनी पड़ी l

पश्चिम बंगाल की सत्ता से सीपीएम- वामदल को आंदोलन के जरिये हटाकर ही ममता बनर्जी उसपर करीब डेढ़ दशक(दो साल बाकी) से काबिज हैं l इसी तरीके से पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को भी वामदलों के आंदोलन के चलते सत्ता से दूर होना पड़ा था l उन आंदोलनों में पार्टियों का हित था तो समर्थन में उनके ही लोग शामिल हुए थे लेकिन यह पहली बार देखने को मिल रहा है जब जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में जन समूह डटा है l 

अपने संवैधानिक पद की गरिमा को किनारे करके चिटफंड भ्रष्टाचार के आरोपी तत्कालीन पुलिस कमिश्नर को सीबीआई जांच से बचाने को उनके साथ धरने पर बैठने और घोटालों के आरोपी अपने ही नेताओं, मंत्रियों के बचाव में सीबीआई दफ्तर पर धरना देने वाली ममता बनर्जी को जूनियर डॉक्टरों के सामने झुकना पड़ाl इतना ही नहीं, उनकी पांच में से तीन मांगें माननी पड़ींl लापरवाह पुलिस कमिश्नर व दो स्वास्थ्य अधिकारियों को हटाना पड़ा l यही होती है जनतंत्र की 'ताकत' जिसके आगे शक्तिशाली को भी झुकना पड़ता हैl यानी इस बार सत्ता के अहंकार के सामने कोई राजनीतिक दल नहीं, सच्चाई और ईमानदारी वाले धर्म के साथ आम जनता मौजूद है l 

आगामी चुनाव में सरकार चाहे जिसकी बने लेकिन यह तय है कि ममता बनर्जी अपनी सरकार के प्रति जन सहानुभूति खो चुकी हैं, क्योंकि यहां की जनता ने प्रशिक्षु महिला डॉक्टर की निर्मम हत्या और बलात्कार का विरोध अपना हित और सुरक्षा त्यागकर किया l

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल 'कट्टर ईमानदार से कट्टर भ्रष्टाचार (आरोपी)' के सफ़र में तिहाड़ जेल जाने से पूर्व नैतिकता को दर किनार करके सीएम पद से इस्तीफा नहीं दिएl सशर्त जमानत मिलने के बाद जब उन्हें लगा कि उनकी कथित ईमानदार छवि जनता की नज़र में उतर गई है तो उसे वापस हासिल करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और अपनी कुर्सी महिला नेता आतिशी को सौंपकर अब अपने पक्ष में विमर्श (नेरेटिव) गढ़ने में लगे हैं l वह इसमें कितना सफल होंगे यह तो वक़्त पर निर्भर है लेकिन कुर्सी से चिपके रहने पर उनकी कथित ईमानदारी और नैतिकता दांव पर लग गई l इसी के चलते जन सहानुभूति भी उनकी हथेली से रेत की तरह फिसल गई l

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