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» »Unlabelled » दिल्ली व पश्चिम बंगाल के सीएम जन सहानुभूति को तरस रहे। Don News Express


 

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-मोदी सरकार ने इनके नैतिकता और अनैतिकता का फैसला जनता की अदालत पर छोड़ दिया, आमजन की नज़र से उतरने के आखिरी कगार हैं अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी l

-सम्विधान की धारा 356 के तहत केन्द्र सरकार के पास वह 

ताकत है जिससे किसी भी राज्य की सरकार को बर्खास्त किया जा सके, लेकिन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविंद व ममता को जनता की मर्जी पर छोड़ दिया l

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-कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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नई दिल्ली/वाराणसी, (तहलका विशेष)l राजनीतिक दल हों या उनके मुखिया नेता दोनों के लिए जनता की अदालत सर्वोच्च होती है l यहीं उनकी लोकप्रियता और सत्ता में बने रहने का फैसला होता है l क्योंकि हर पांच साल में इन्हें अपने चुनाव के लिए उसी जनता रूपी मतदाता के पास जाना होता है l कुछ वर्षों तक यह अपने विविध ड्रामे से विपक्षी दलों की कमी गिनाने व आमजन की आँख में धूल झोक कर चुनाव जीतते रहते हैं लेकिन जब इनके पास खेलने के लिए कोई कार्ड नहीं बचता है तब वह जन सहनुभूति को तरसते हैं, ऐसे ही दो राज्यों के मुख्यमन्त्री दिल्ली के अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी हैं l

इनमें केजरीवाल समेत उनकी पार्टी के करीब आधा दर्जन नेता- कार्यकर्ता तिहाड़ जेल हो लिए हैंl  अब केजरीवाल ने नया ड्रामा सीएम आवास और कुर्सी छोड़ने का ऐलान किया है हालांकि इससे आमजन को कोई सरोकार नहीं है l उनकी ईमानदारी वाले टूल्स जैसे मफलर, चप्पल, आड़े- तिरछे बटन लगी नीली शर्ट, पुरानी वैगनआर कार आदि जनता की नज़र में 'शीश महल' में दफ़न हो चुके हैं और तिहाड़ जेल जाते ही नैतिकता का मुलम्मा भी उतर गया l उन्होंने जेल जाने से पूर्व महिलाओं की आर्थिक मजबूती के लिए एक हजार रुपये हर माह देने की घोषणा की थी l इस कार्ड का उपयोग वह हरियाणा में हो रहे और दिल्ली में फरवरी में होने वाले चुनाव में करना चाहते थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत में लगी छः शर्तों ने उन्हें बेबस कर रखा है l 

यानी वह सचिवालय नहीं जा सकते, किसी फाइल पर दस्तखत नहीं कर सकते, कोई कैबिनेट बैठक नहीं बुला सकते जैसी अन्य शर्तों के चलते ही उन्होंने मुख्यमन्त्री पद व आवास छोड़ने का ऐलान करके नया ड्रामा खेल दिया है l यदि उन्होंने अपनी पत्नी को सीएम बना दिया तो छोड़ने के बाबजूद वह पॉवर सेंटर में ही रहेंगे l बुद्धिजीवी तबका मानता है कि यदि उनमें नैतिकता रही होती तो वह पहली बार जेल जाते ही इस्तीफा दे दिए होते l जनता की सहानुभूति का परिणाम उन्हें लोकसभा चुनाव में ही मिल गया था l अब उनकी ईमानदारी रूपी काठ की हांडी फ़िर चूल्हे पर चढ़ने की स्थिति में नहीं दिखती l

दूसरे राज्य पश्चिम बंगाल की स्थिति इतनी भयावह है कि वहाँ रहने वाले हिंदू खुद को अल्पसंख्यक मानते हैं l यहाँ के लोगों को अपने मकान या दुकान बनाने को अघोषित सरकारी गुंडों को हफ्ता चुकाना पड़ता है l  यहाँ विपक्षी दलों के नेता भी डरते हैं l घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या या अन्य के वोट की उम्मीद के बावजूद ममता बनर्जी की सरकार को 'आरजी कर' मेडिकल कॉलेज की महिला प्रशिक्षु चिकित्सक से रेप और उसकी नृशंस हत्त्या के बाद हो रहे आंदोलन ने हिलाकर रख दिया है l ममता चाहतीं हैं कि केन्द्र सरकार उन्हें बर्खास्त कर दे ताकि उन्हें जनता की सहनुभूति मिल जाए लेकिन पीएम मोदी वहाँ हुई घटना पर राष्ट्रपति की टिप्पणी के बावजूद ममता सरकार को जनता की अदालत में छोड़ रखा है l 

पश्चिम बंगाल में मेडिकल रेजिडेंट डॉक्टर के साथ अमानवीयता को लेकर चिकित्सकों के साथ आंदोलन में हर तबका 'आम से लेकर खास' तक हो लिया है लिहाजा ममता बनर्जी अब जनता की सहनुभूति को तरस रही हैं l दोनों मुख्यमन्त्री के ड्रामे का पटाक्षेप  जनता की अदालत में है l फैसला मतदाता ही करेंगे l

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