हैरतअंगेज: जौनपुर में ऐसा चिकित्सक जो हर मर्ज का है विशेषज्ञ
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-पूर्वांचल के जौनपुर में स्वास्थ्य क्रांति का हाल: निजी अस्पतालों पर नहीं है स्वास्थ्य विभाग का नियंत्रण, 10 रुपये की दवा की कराई जाती है 100 की एमआरपीl काग़ज़ पर होती हैं दवा कंपनियाँl
-जौनपुर है बानगी, निजी अस्पतालों में यह बीमारी पूर्वांचल और प्रदेश भर में है फैली, यहां मरीजों को कपड़े की तरह आर्थिक रूप से निचोड़ लिया जाता है l
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कैलाश सिंह/ बीपी सिंह
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लखनऊ/वाराणसी, (तहलका विशेष)l उत्तर प्रदेश के हर जिले में कमोबेश सरकारी अस्पताल रेफरल सेंटर बन गए हैं l ब्रांडेड दवाओं का अकाल पड़ता जा रहा है जबकि पिछले दिनों केन्द्र सरकार ने दिल्ली के एक मामले में कोर्ट के निर्देश पर ब्रांडेड दवाएं लिखने के लिए चिकित्सा विभाग पर सख्ती बरती थी लेकिन यूपी के तमाम जनपदों में गैर ब्रांडेड दवावों की खपत निजी अस्पतालों में तो भरमार हैl इसकी बानगी जौनपुर और बनारस में हर कदम पर आबाद है l किसी मरीज को गैस की परेशानी हो तो उसकी हजारों रुपये की जाँच करके हार्ट की दवा दे दी जाती है, 25 रुपये की वह दवा आर्डर पर 200 रुपये की एमआरपी कराई गई होती हैl मरीजों में से कुछ तीमारदारों को प्रतिभावान दलाल बना लिया जाता है l सरकारी अस्पताललों को रेफरल सेंटर वहाँ तैनात चिकित्सकों ने बना रखा है, जबकि तमाम कर्मचारी दलाली के काम में लग गए हैं l
दरअसल जौनपुर की बानगी इसलिए दी जा रही है क्योंकि यहाँ उपर्युक्त मामलों में भुक्तभोगी प्रमाण लेकर घूम रहे हैं जिनकी सुनवाई स्वास्थ्य विभाग में प्रदेश की राजधानी तक नहीं हो रही है l इसके अलावा गैर ब्रांडेड दवाओं का शिकार 90 फीसदी निजी अस्पतालों में मरीजों को बनाया जा रहा है l आर्थिक रूप से निचोड़े जाने वालों में एमआर (कम्पनियों के दवा बेचने वाले) भी शुमार हैं l यह सिलसिला कोरोना काल से सर्वाधिक हो गया है l
इस मामले की परत दर परत रिपोर्ट अगले एपिशोड में मिलते रहेंगे l अब यहाँ के एक चमत्कारी डॉक्टर का बखान बानगी के तौर पर सुनिये- जौनपुर शहर का नईगंज का इलाका इलाज के नाम पर लूट का हब बन चुका है l यहाँ एक कथित चिकित्सक के यहां किसी भी बीमारी के मरीज का नम्बर 24 घंटे में आता है, जबकि बीएचयू में भी इतनी लम्बी लाइन नहीं लगती है l कोरोना काल में डॉक्टरी की पढ़ाई किए बिना इसे फाइनल की डिग्री मिली है l यह बताता है एक बीमारी का विशेषज्ञ लेकिन इलाज बच्चे से लेकर बूढों, महिलाओं का दिमाग, हृदय, दुर्घटना, आँख, कान, नाक से लेकर बाबासीर भगन्दर तक का भी करता है l बाहर के मेडिकल स्टोर पर 10 रुपये की दवा इसके यहाँ 150 में मिलती है l हालांकि यही हाल तमाम निजी अस्पतालों में भी हैl लेकिन इसकी खासियत कुछ अलग इसलिए है क्योंकि यह नये से लेकर पुराने कथित जन प्रतिनिधियों को मरीजों के पैसे से खुश रखता है l
इसकी भी बानगी देखें- यह पहले ही मरीजों की बिलिंग भुगतान रोज का कर दिया है, जब मरीज किसी रसूखदार से फोन कराता है तब वह बिल को भारी भरकम बनाकर उसमें से दस या बीस फीसदी कथित नेताजी के नाम से छूट कर देता है l ........ और अगले एपिशोड में l







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