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 नरेंद्र मोदी- शेख हसीना के राष्ट्रहित की दोस्ती का नतीजा रहा बांग्लादेश में तख्ता पलट

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-कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-शेख हसीना द्वारा भारत में रहते हुए 'सेंट मार्टिन द्वीप' वाले बयान ने अमेरिका के चेहरे से नकाब दुनिया के सामने हटा दियाl

-विश्व समुदाय के क्षितिज पर अमेरिकी महाशक्ति की चुनौती को उभरती महाशक्ति भारत द्वारा दिया गया कूटनीतिक जवाब l

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नई दिल्ली, (तहलका विशेष)l इसी पांच अगस्त को हमारे पड़ोसी मित्र देश 'बांग्लादेश' में हुआ तख्ता पलट अमेरिका की नाजायज मांग को राष्ट्रवादी नेता शेख हसीना द्वारा ठुकरा देना मुख्य कारण बनाl  दरअसल बांग्लादेश के 'सेंट मार्टिन द्वीप' के इस छोटे से टुकड़े पर अमेरिका अपना सैनिक एयरबेस (हवाई अड्डा) बनाकर चीन, भारत समेत अन्य देशों पर निगरानी रखने का मंसूबा पाले हुए था जिसे शेख हसीना ने पिछले साल ही चकनाचूर कर दिया था l वह चाहतीं तो उसकी मांग पूरी करके बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं रहतीं और उनके देश में मारकाट, उपद्रव भी नहीं होते, लेकिन अपने राष्ट्रहित के मद्देनज़र उन्होंने ऐसा नहीं किया जिसकी कीमत उन्हें कुर्सी और देश छोड़कर चुकानी पड़ी l

 इधर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें खतरे से बचाकर अपने देश में लाकर सुरक्षित कर लिए l उधर बांग्लादेश के सनातनियों ने भागने की बजाय मुकाबला कियाl उन्होंने जमायते इस्लामी व अन्य विदेशी ताकतों का जवाब  गाँधीगीरी ' अहिंसात्मक विरोध प्रदर्शन' से दिया l परिणाम स्वरूप वहां की कार्यवाहक सलाहकार सरकार ने उनसे माफ़ी मांगी और सुरक्षा का वचन भी दिया, इतना ही नहीं, उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात कर हिंदुओं की सुरक्षा का भी आश्वासन दिया l 

दरअसल बांग्लादेश में उपद्रव और तख्ता पलट की पटकथा पिछले साल 2021 में तब लिख दी गई जब अमेरिका ने श्रीमती शेख हसीना से 'सेंट मार्टिन द्वीप मांगा और उन्होंने देने से साफ़ इनकार कर दिया था, जाहिर है वह थोड़ा सतर्क तो थीं लेकिन मोदी की इंटेलिजेंस ने उन्हें और सचेत कर दिया था l  यही कारण है कि बढ़ते उपद्रव के बाद जब वहां की सेना ने हाथ खड़े कर दिए और सेना प्रमुख द्वारा जान बचाने के लिए उन्हें मात्र 45 मिनट का समय दिया गया तो वह सेना के विमान से भारत पहुँच गईं l यह सबकुछ सुरक्षा के साथ इतनी तेज़ी से होना ही भारत के पीएम की तत्परता और एक राष्ट्रवादी द्वारा दूसरे राष्ट्रवादी की मदद को ही नहीं दर्शता बल्कि विश्व समुदाय में दो राष्ट्राध्यक्षों की दोस्ती की मिसाल भी प्रस्तुत करता है l 

बांग्लादेश की घटना के बहाने बहुत गहरी अंतर्राष्ट्रीय साजिश का भी पर्दाफाश हुआ है l एक महाशक्ति अमेरिका द्वारा दूसरी उभरती महाशक्ति भारत के बीच कैरम सरीखी कूटिनीतिक (डिप्लोमेसी) के इस खेल का पर्दाफाश भारत में रहते हुए शेख हसीना द्वारा दिए गए बयान से हुआ l इस बयान को बांग्लादेश में रहते हुए पहले भी वह दे सकतीं थीं लेकिन उन्होंने अपने देशहित को ध्यान रखते हुए नहीं दियाl उन्हें मोदी की कूटनीतिक रणनीति पर भी भरोसा था l वैसे भी निशाने पर भले ही बांग्लादेश रहा लेकिन इस अंतर्राष्ट्रीय साजिश का असली लक्ष्य भारत था l 

गौर करें पीएम नरेंद्र मोदी की हालिया रूस यात्रा पर तो बात समझ आयेगी, उनकी रूस यात्रा अमेरिका और यूरोपीय देशों को नागवार लगी थी जबकि भारत ही रूस से कच्चा तेल लेकर इन देशों को रिफाइंड करके दे रहा हैl सोलर एनर्जी में भारत के आत्मनिर्भर होने से भी इन्हें तकलीफ हो रही है l भारत ही वह ताकत बनकर उभरा जिसने अपने देश के नागरिकों, छात्रों को रूस- युक्रेन युध्द बीच में रुकवाकर बाहर निकाल लायाl इतना ही नहीं, मोदी ने पाकिस्तान के अलावा अमेरिका और योरोपेन कंट्री के लोगों को भी वहाँ से बचाया l 

इस अंतर्राष्ट्रीय साजिश को समझने के लिए इसी 15 अगस्त को लाल किला से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के  दिए गए भाषण को सुनना पड़ेगाl उस भाषण को समझने के लिए नजरिया अंतर्राष्ट्रीय सन्दर्भ में रखना होगाl उन्होंने कहा था कि ' भारत युद्ध का नहीं, बुद्ध का देश हैl' उनका मन्तव्य था कि बाहर की अपेक्षा अपने अंदर के दुश्मन अधिक खतरनाक होते हैं l उनके भाषण को समझ लेने पर बांग्लादेश के परिप्रेक्ष्य में गहरी अंतर्राष्ट्रीय साजिश की पटकथा 'किताब' की तरह खुलकर सामने होगी l

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