सांस्कृतिक पुनर्जागरण व हिंदू चेतना में नई ऊर्जा भरने वाला रहा योगी का भाषण
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-योगी आदित्यनाथ के भाषण के मायने: मानसून सत्र में मुख्यमंत्री का भाषण विधान सभा में जरूर हुआ लेकिन संबोधन सनातनी व भाजपा के उन निष्ठावान कार्यकर्ताओं के लिए था जो लोकसभा चुनाव परिणाम 4 जून 2024 के बाद निराश हो गए थे l
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-कैलाश सिंह-
राजनीतिक सम्पादक
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लखनऊ (तहलका विशेष)l इसी एक अगस्त, दिन बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ का भाषण वैसे ही था जैसे 1996 में 13 दिन की सरकार में विश्वास मत के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद को नहीं, बल्कि राष्ट्र को संबोधित किया था, उसका असर राष्ट्रव्यापी हुआ और 1998 में भाजपा की पूर्ण कालिक सरकार केन्द्र में आई थीl ठीक उसी तरह योगी का संबोधन विधान सभा या विधायकों के लिए अथवा किसी के विरोध में नहीं, बल्कि देस में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और हिंदू चेतना में नई ऊर्जा भरने के लिए थाl उनके संबोधन का लक्ष्य मिशन 2027 पर भी माना जा सकता है l इस संबोधन ने उनके चेहरे को फ़ायर ब्रांड की बजाय बड़े फ़्रेम में 'गम्भीर हिंदुत्व का चेहरा' के रूप में स्थापित किया जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मंशा के अनुरूप नज़र आया l
योगी आदित्यनाथ के इस भाषण से एक बात और साफ़ महसूस हुई कि वह वोट के लिए तुष्टिकरण को राजनीति में नहीं आये हैं और न ही उन्हें पद -प्रतिष्ठा की लालसा है, उन्हें किसी दूसरे धर्म को लेकर ऐतराज भी नहीं है, बल्कि उनकी सोच सनातन संस्कृति को स्पष्ट करती परिलक्षित हुई, तभी तो उन्होंने कहा-' मैं यहाँ कोई नौकरी करने या सम्मान पाने नहीं आया हूँ, इससे अधिक प्रतिष्ठा मुझे गोरक्ष पीठाधीश्वर के रूप में मिलती है, मैं तो सामाजिक, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और हर आमजन की सुरक्षा, उनके सम्मान और गौरव को स्थापित करने की सोच रखता हूँ l'
सीएम योगी ने लखनऊ के गोमती नगर में हुई घटना में दोषी पुलिस प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई करके दो बातों का संकेत दिया- एक यह कि प्रदेश में हमारी सरकार किसी भी दोषी को नहीं बख्शेगी, महिलाओं की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि हैl दूसरे इस कारवाई से उन्होंने खुद पर लग रहे ठाकुरवाद के आरोप को भी जातिवाद के सांचे से बाहर करके निराधार कर दियाl
योगी आदित्यनाथ अन्य प्रांतों की सरकारों की तरह यूपी की सरकार नहीं चला रहे हैं, वह तो कानून सम्वत नियम के तहत कानून व्यवस्था को संचालित करने में भरोसा रखते हैंl संबोधन के दौरान उनके चेहरे पर भाजपा सरकार व संगठन में जारी कलह या कुर्सी जाने का खतरा अथवा षड्यंत्र में लगे मन्त्रियों को लेकर कोई सिकन नहीं थीl उन्हें चिंता थी देस- प्रदेश में हो रहे सांस्कृतिक क्षरण को लेकर, इसी के पुनर्जागरण को ध्यान में रखकर विधान सभा के मानसून सत्र में उनका यह संबोधन पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की याद को ताज़ा कर दिया l अटल के सम्बोधन में राजनीति में राष्ट्रवाद व संसदीय मायने अधिक थे जबकि योगी के संबोधन में हिंदुत्व की चेतना में धर्म की स्थापना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की चिंता परिलक्षित हुई l







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