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मानसून ऑफर के बाद अखिलेश की नो इंट्री से खुली भाजपा की भगदड़, पार्टी हाई कमान के चक्रव्यूह में घिरे योगी

-विधान सभा की 10 सीटों पर होने वाला उप चुनाव ही तय करेगा योगी के मिशन 2027 के फाइनल में पहुँचने, उनकी टीम की एकजुटता और ताकतl लड़ाई अपने दल के भितरघातियों से भी होगी l विपक्षी दल भी कमर कसकर तैयारl

-सपा सुप्रीमों अखिलेश समझ गए कि गैर दलों से आये नेताओं से पार्टी का अनुशासन होता है भंग और कार्यकर्ताओं में छा जाती है निराशा, भाजपा में कलह के मूल में गैर दलों से आए दीमक रूपी नेताओं ने ही उसे रसातल में पहुंचाया l



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-कैलाश सिंह-

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लखनऊ (तहलका विशेष)l देवकी नन्दन खत्री के उपन्यास 'चंद्रकांता' के कैरेक्टर कुंवर इंद्रजीत सिंह अपने भाई आनंद सिंह के साथ जिस तरह मायारानी के तिलिस्मी बाग में अय्यारों के बीच फंसे थे उसी तरह यूपी के राजनीतिक चक्रव्यूह में भाजपा हाई कमान के जासूसों के बीच यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ फंसे हैंl जिस तरह चंद्रकांता द्वेष, घृणा एव्ं ईर्ष्या पर प्रेम के विजय की इस महागाथा ने 19 वीं सदी के अंत में धूम मचाई थी उसी तरह भाजपा में हो रही कलह से संकेत मिलने लगा है कि पार्टी में भगदड़ की धूम हैl पार्टी रसातल का रुख कर चुकी हैl कहीं कल्याण सिंह के शासनकाल के बाद अरसे तक सत्ता से दूर रहने वाली यह पार्टी फ़िर उसी इतिहास को दोहराने जा रही हो तो हैरत नहीं होगी l

भाजपा व आरएसएस(संघ) सूत्रों की मानें तो दो साल से दिल्ली के निशाने पर रहे लखनऊ रबर स्टैम्प और रिमोट वाली सत्ता संचालन से मना किया तो भाजपा हाई कमान के इशारे पर दोनों डिप्टी सीएम ने खुलकर ताल ठोक दी l अब 10 विधान सभा सीटों पर होने वाले उप चुनाव में योगी ने कमर कस ली हैl उन्हें विपक्षी दल सपा और कांग्रेस के साथ भाजपा के भीतरघात से भी लड़ना पड़ेगा l बताया जाता है कि उनकी हर गतिविधि पर नज़र रखने को गुजरात लॉबी ने जासूस छोड़ रखे हैं l बाकी तमाम विधायक और पार्टी नेता योगी के नौकरशाही प्रेम के कारण दूर हैंl कुछ संघनिष्ठ नेता व विधायक भी चुप्पी साधे हैं l नौकरशाही में अधिकतर  तो अभी भी दिल्ली के रिमोट से चल रहे हैं l मुख्य सचिव पद पर मनोज कुमार सिंह की नियुक्ति से जहाँ अमित शाह और मोदी खफ़ा हैं वहीं निचले पायदान के नौकरशाहों के बोल वचन से योगी पर ठाकुरवाद का आरोप भी लगने लगा है l आरोप को हवा देने वाले जब गोरक्षपीठ में जाते हैं तब ब्राम्हण, क्षत्रिय वैश्य होने के बावजूद पैर छूते समय योगी को 'महाराज जी' बोलते नहीं थकते हैंl  तब नहीं कहते हैं कि ये तो ठाकुर हैंl यह काफी सच है कि पार्टी नेताओं, विधायकों की सुनवाई नौकरशाह नहीं करते हैं जबकि चुनावों के दौरान यही आगे रहते हैं, संघ ने इस मामले में गम्भीरता से विचार करने की बात योगी से कही है l

सूत्र बताते हैं की बसपा से आये बृजेश पाठक से पहले डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा थे, वह संघनिष्ठ हैं l उन्हें गुजरात लॉबी ने हटाया तो योगी को बहुत खला, शायद इसी कारण आज भी यूपी में दिनेश शर्मा के रुतबे में योगी ने कोई कमी नहीं आने दी हैl

इधर सपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी सुप्रीमों अखिलेश यादव ने सौ विधायक लावो, सीएम बन जाओ का मानसून ऑफर दे दिया था, लेकिन कुछ दिन बाद उन्होंने भाजपा के नेताओं के लिए नो इंट्री का बोर्ड लगा दिया l भाजपा में भगदड़ का खुलासा तब हुआ जब सपा के ही एक नेता ने भाजपा के एक नेता को लेकर दिल्ली में अखिलेश यादव से मुलाकात करके उन्हें पार्टी में शामिल कराने की बात कही l इसपर अखिलेश ने सख्ती से मना कर दिया l भाजपा के वह नेता बाहर कार में ही बैठे थे और फिर वापस हो गए l इसी तरह फैजाबाद अयोध्या के सांसद ने भी भाजपा के एक नेता को सपा में शामिल कराने की बात कही तो अखिलेश ने उन्हें समझाया कि बाहरी दीमक रूपी दल- बदल करने वाले नेता पार्टी को चालकर बर्बाद कर देंगे और कार्यकर्ता भाजपा के कार्यकर्ताओं की तरह जोशविहीन होकर घर बैठ जाएंगेl 

भाजपा में आंतरिक कलह तब तक कायम रहेगी जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति नहीं हो जाती l नया अध्यक्ष होने पर समूची पार्टी सांगठनिक तौर पर बदलेगी, हर पदाधिकारी की एक दशक पूर्व जैसी अहमियत होगी तब वह उत्साह के साथ पार्टी की ताकत बनेंगे l

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