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» »Unlabelled » जीते तो मोदी, हारे तो योगी-- 'अमित शाह और योगी के बीच शीत युद्ध सतह पर आया'।Don News Express



 --जीते तो मोदी, हारे तो योगी--

'अमित शाह और योगी के बीच शीत युद्ध सतह पर आया'



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-गुजरात लॉबी ने लोस चुनाव में हार का ठीकरा फोड़ने के लिए योगी को फ़िर घेर लिया, एक तरफ़ राष्ट्रीय संगठन महामन्त्री बीएल संतोष को भेजा लखनऊ दूसरी ओर प्रदेश के हर जिले में भाजपा कार्यकर्ता या मतदाता अभिनंदन के नाम पर समारोह में पार्टी दो खेमे में नज़र आने लगीl

-योगी आदित्यनाथ को दिल्ली कूच से पूर्व लखनऊ से गोरखपुर लौटाने की कोशिश दो साल से चल रही, यूपी में योगी की मजबूत जड़ उखड़ गई तो मोदी के बाद शाह का रास्ता हो जाएगा निष्कंटक, योगी के लिए विधान सभा की 10 सीटों पर होने वाला उप चुनाव होगा सेमीफ़ाइनलl

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कैलाश सिंह/ए के सिंह

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नई दिल्ली/लखनऊ(तहलका विशेष)l लोकसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार का ठीकरा यूपी के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ के सिर फोड़ने के लिए एक बार फ़िर गुजरात लॉबी का प्रयास तेज़ हो गया है l उसी नज़रिए से राष्ट्रीय संगठन महामन्त्री बीएल संतोष को लखनऊ भेजा गया l उन्होंने पार्टी कार्यालय पर हो रही समीक्षा बैठक में सीएम योगी को भी शामिल किया l विधायकों, मन्त्रियों के अलावा भाजपा के पदाधिकारी भी मौजूद रहेl घूम- फिर कर बात योगी के 'मिशन 80' का नारा जो उन्होंने दो साल पूर्व दिए थे उसी पर अटकी, लेकिन यह बात भी अहम रही कि टिकट वितरण से लेकर प्रचार समेत पूरी कमान तो अमित शाह के हाथ में थी फ़िर हार के लिए योगी कैसे जिम्मेदार हुए? यानी जीते होते तो मोदी के हिस्से में श्रेय जाता और हार गए तो योगी को जिम्मेदार बनाने की कोशिश का नाम है चुनावी समीक्षा l

भाजपा सूत्रों के मुताबिक बीएल संतोष द्वारा की जा रही समीक्षा में ही उत्तर प्रदेश की सरकार यानी मन्त्रियों, विधायकों से लेकर नौकरशाही तक दो धड़े में उभरकर सामने आ गए l क्योंकि लोगों को महसूस हुआ की श्री संतोष को भाजपा हाई कमान अमित शाह ने भेजा है तो पार्टी भी उन्हीं के हाथ में है l यहीं लोगों ने खुलकर बोलना शुरू किया कि  पुलिस- प्रशासन कार्यकर्ताओं तो दूर विधायकों तक को गम्भीरता से नहीं लिया l गुजरात लॉबी यही सिद्ध करने में लगी रही कि योगी के अफ़सरों ने पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित किया l जबकि बसपा या सपा की सरकारों में यही अफ़सर हाथ बांधे खड़े नज़र आते थे l योगी पर जातिवाद का पुराना तोहमत भी दोहराया गया l योगी लॉबी भी पीछे नहीं रही, उन्होंने कहा कि यूपी की नौकरशाही की कमान भी संगठन की तरह शाह के ही हाथ में थी l संगठन की बैठकें, गैर भाजपाइयों और क्षेत्र में खराब प्रदर्शन करने वाले सांसदों को भी टिकट देना, प्रचार के अलावा सारी रणनीति पर प्रदेश के विधायकों, मन्त्रियों को लगाने का कार्य भी तो शाह ने ही कियाl ऐसे में प्रत्याशी भी संविधान और आरक्षण संबंधित बयान देते रहे जो विपक्षी गठबंधन इंडिया के लिए फ़ायदेमन्द और हमारे लिए घातक सिद्ध हुआ l फिलहाल सूत्रों की मानें तो 'शाह' को बस योगी को हटाने का मजबूत बहाना चाहिए जो उनके द्वारा भेजे गए बीएल संतोष चुनावी समीक्षा बैठक से निकालकर उन्हें को सौंपेंगे l हालांकि बीएल संतोष को यह पता है कि संघ प्रमुख की सरपरस्ती योगी पर है और यूपी में योगी उसी तरह लोकप्रिय हैं जिस तरह समूचे भारत में हिंदुत्व के बड़े चेहरे के रूप में हैं l

दिलचस्प तो ये है कि प्रदेश के सभी जिलों में भाजपा कार्यकर्ता, मतदाता अभिनंदन अथवा धन्यवाद लिखे बैनर लगाकर समारोह आयोजित हो रहे हैं l इनके बैनरों से यही स्पष्ट नहीं हो रहा है कि अभिनंदन कार्यकर्ताओं का है अथवा मतदाताओं का! खैर इसके दीगर आयोजित समारोहों में एक मुद्दा प्रमुख यह उभर रहा है कि योगी आदित्यनाथ के अफ़सर बेलगाम हैं l जौनपुर में हारे प्रत्याशी कृपाशंकर तो जिले की पुलिस पर बरसे, कहा यदि एसपी से लेकर थानेदार नहीं सुधरे तो इन्हें हटाने को वह दिल्ली शिकायत करेंगे l इसका मतलब शायद उन्हें पता है कि यूपी पुलिस दिल्ली हाई कमान के अधीन है l इसके उलट देवरिया के सलेमपुर में समारोह के दौरान हारे प्रत्याशी ने पार्टी पदाधिकारियों व मन्त्री पर आरोप लगाएl इसी तरह की घटनाएं विभिन्न जिलों से मिलने लगीं हैं जो भाजपा में बढ़ी अंतरकलह को सतह पर ला रही हैं l जल्द ही प्रदेश की खाली हुई 10 विधान सभा सीटों पर उप चुनाव होने हैं और पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही है l ऐसे में सीएम योगी इस चुनावी सेमी फाइनल को कैसे और किसके बलपर जीतकर 2027 के फाइनल में पहुंचेंगे? यह सवाल भी संगठन की 'एका' के नज़रिए से बड़ा है l

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