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 भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कशमकश


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-एक दशक से भाजपा का आंतरिक लोकतन्त्र सरकार में है समाहित, यानी पार्टी और सरकार का मतलब एक ही हुआ, जेपी नड्डा का बढ़ा कार्यकाल भी बीते महीने हुआ खत्म, 'सरकार' चाहते हैं एस मैन, संघ भाजपा में फिर लाना चाहता है लोकतन्त्र l

-अभी तक हार का ठीकरा फोड़ने के लिए नहीं मिल पा रहा है 'सिर',  इधर यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी लोस चुनाव में अधिक सीटें हारने के कारणों की खोज के लिए विधायकों और मन्त्रियों से लिए उनके सुझाव, सहयोगी पार्टियां रहीं दूर l

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कैलाश सिंह/ए के सिंह

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नई दिल्ली/लखनऊ(तहलका टीम)l केन्द्र में एनडीए की सरकार बने एक महीना पार हो गया और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बढ़ा कार्यकाल भी 30 जून को समाप्त हो गयाl इससे पूर्व वह मोदी कैबिनेट का हिस्सा भी बन चुके हैं, लेकिन नये अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पार्टी हाई कमान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को सामने पाकर कशमकश में हैl क्योंकि मोदी एनडीए के नेता बने या विरोध नहीं होने पर मान लिया गया! यह एक ही बात है लेकिन  सच यह है कि भाजपा के संसदीय दल की न बैठक हुई और न ही सहमति ली गई क्योंकि  पार्टी का लोकतन्त्र एक दशक से दो लोगों और एक कमरे में सिमटकर रह गया था, अब यह संख्या बढ़कर तीन हो गई, यह तीन लोग हैं मोदी, शाह और नड्डाl यही स्थिति भाजपा में लोकतन्त्र के होने या न होने की गवाही दे रहा है l

भाजपा सूत्रों के मुताबिक इंडिया गठबन्धन के नेता सरकार के गिरने का इंतज़ार चातक पंछी की तरह कर रहे हैं लेकिन उनका इंतज़ार हसीन सपना बना हुआ हैl तेलगूदेशम पार्टी और जनता दल यू नामक दोनों सहयोगी दलों के नेताओं पर एनडीए यानी प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी से ज्यादा इंडिया के नेताओं को भरोसा है जबकि वह लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव में अपनी उम्मीद और भरोसे को पस्त होते देख चुके हैं, उन्हें डिप्टी स्पीकर के चयन में भी एनडीए की इन बैशाखियों का सहयोग नहीं मिल पा रहा हैl यही प्रकरण एनडीए की केन्द्र सरकार की मजबूती की गवाही दे रहा हैl दरअसल दोनों दलों के अपने प्रदेशों के हित इस सरकार से अलग तरह की उम्मीदों वाले हैं, वह हित पूरा हुए बगैर वे अपने पाँव डिगने नहीं देंगेl उनकी मांग धीरे- धीरे पूरी होती रहेंगी और सरकार इसी तरह चलती रहेगी l

 संघ सूत्रों की मानें तो भाजपा हाई कमान की चिंता नये राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर है l इसमें संघ आड़े आ रहा है l संघ चाहता है की अध्यक्ष ऐसा हो जो राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा और उसके आंतरिक लोकतन्त्र को जिंदा करके प्रांतों, जिलों और ब्लॉक स्तर तक निष्क्रिय हुए पार्टी कार्यकर्ताओं में उमंग और जोश भर सके, जबकि मोदी और अमित शाह एस मैन को तलाश रहे हैं, इसी कशमकश में सरकार या हाई कमान हैl एनडीए के जरिए मोदी ने जीत का सेहरा तो बांध लिया लेकिन पार्टी की हुई पराजय का ठीकरा फोड़ने के लिए किसी का सिर नहीं मिल पा रहा है l कोशिश तो उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के सिर पर हार का ठीकरा फोड़ने की जारी है लेकिन उनके मोहरे पिटते जा रहे हैं, ऊपर से संघ भी उनके साथ खड़ा है क्योंकि संघ मानता है कि योगी से बड़ा और बेदाग हिंदुत्व का चेहरा दूजा कोई नहीं हैl लोस चुनाव से पूर्व भाजपा में दागदार चेहरों और गैर भाजपाइयों की हुई भर्तियां, इन्हीं में अधिकतर टिकट वितरण ने जहाँ पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के जोश को ठंडा करके उनकी उम्मीदों का गला घोट दिया वहीं हाई कमान मोदी लहर पर सवार होकर नीचे अपने पिटते मुद्दों को नहीं देख पाया l दिलचस्प तो ये है कि हाई कमान इन कारणों के चलते अपनी हार भी नहीं मान रहा है l इसीलिए ठीकरा फोड़ने को एक अदद बड़े 'सिर' की तलाश कर रहा है l

इधर उत्तर प्रदेश में संघ से मिली ऊर्जा के बाद से मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ नौकरशाही में पुलिस प्रशासन को दुरुस्त करने के साथ आमजन हित में जहाँ ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं वहीं पार्टी के विधायकों, मन्त्रियों के साथ समीक्षा बैठक में अधिक सीटों पर हुई हार के कारणों की तलाश में उनके सुझाव मांगे, अधिकतर ने बताया कि संविधान बदलने, चुनावी मुद्दे फेल होने, आरक्षण आदि को मुद्दा बनाकर विपक्षी दल अति पिछड़ों, दलितों और मुसलमानों को अपनी तरफ खींचने का काम किया l साथ ही पुलिस, प्रशासन की बेरुखी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव पूर्व से निराश किए थी, गैर भाजपाई लोगों को टिकट देना आग में घी का काम किया l ऐसे में सपा के दागदार चेहरे भी चुनावी अखाड़े के पहलवान बन गए l

इस तरह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नियुक्ति का मामला अटका पड़ा है l पार्टी सूत्रों का मानना है कि अध्यक्ष की कुर्सी सवर्ण या पिछड़े वर्ग के हाथ में दी जा सकती है लेकिन वह संघनिष्ठ भी होना चाहिए, इसी कशमकश में हाई कमान है l

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