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 आर एस एस ने माना: भाजपा कार्यकर्ताओं के असन्तोष की नींव पर यूपी में उभरा पीडीए


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-लोस चुनाव में मोदी लहर पर सवार भाजपा हाई कमान असन्तोष को डर के रूप में देखा,  चुनाव बाद वह भी खत्म हुआ, योगी आदित्यनाथ की कुर्सी नहीं हिली और वह अपनी कमजोरी पहचान कर मिशन 2027 के तहत अपराध नियंत्रण के साथ भ्रष्टाचार व बेरोजगारी दूर करने को कारवाई की रफ़्तार बुलेट ट्रेन सरीखी कर दिएl

-एनडीए की केन्द्र सरकार के जरिए भाजपा हाई कमान ने यूपी के चुनावी कुरु क्षेत्र को बांटकर इंडिया गठबंधन के पीडीए को ध्वस्त कर सनातन को फ़िर शीर्ष पर रखने का मंसूबा बनाया l लोकसभा में स्पीकर पद को लेकर जद यू और टीडीपी को ऐतराज नहीं, उनकी अपने प्रांतों की जरूरतें अहम l

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कैलाश सिंह/अशोक सिंह

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नई दिल्ली/लखनऊ(तहलका विशेष)l जब देश में राष्ट्रीय राजनीति उफान पर पहुंची तब एक बार पहले भी समाज को जातिवाद में बांटने वाले राजनीतिज्ञों ने अपनी फ़ितरत दिखाई थी l यह वाकया 1966-1967 का हैl तब इंदिरा गाँधी प्रधानमन्त्री थीं और कांग्रेस की राजनीति उफान पर थीl यही वह दौर था जब चौ चरण सिंह ने किसानों, गरीबों की सोच पर बीकेडी की स्थापना करके समाज को जातियों में बांटने का रास्ता प्रशस्त कियाl इसका दंश आज़ तक उत्तर प्रदेश झेल रहा है l वर्ष 1984 में जब राजीव गाँधी ने राष्ट्रीय राजनीति में 400 के पार सीट हासिल कर अपना परचम लहराया तब अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर भारत का नाम चमकने लगाl इस दौरान फ़िर भारतीय राजनीति पर ग्रहण लगा, तब 1989 का साल था और राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में बनी सरकार मण्डल के कमण्डल में डूब गई लेकिन समाज को जातियों में बांटने का काम दोहरा दियाl वह जख्म भीतर से हरा ही रहा l इसी को नासूर बनने से रोकने को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहयोग से मोदी की सरकार ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श पर चलते हुए निषाद राज और शबरी( प्रतीक) को गले तो लगाया लेकिन सवर्णों को दर किनार करते हुए पार्टी कार्य कर्ताओं को भी महत्त्वहीन कर दियाl पार्टी हाई कमान मोदी लहर पर सवार था और घमण्ड में संघ को ही गैर जरूरी बता दिया l लोस चुनाव में गैर भाजपाई प्रत्याशियों के हर दाग को पैसे से धुलकर देखा तो पार्टी कार्यकर्ता तमाशबीन बन गएl इस नब्ज को पहचानकर इंडिया गठबंधन के हिस्सेदार अखिलेश यादव ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्प संख्यक) के तहत प्रत्याशी उतार दिए जिसमें उन्हें सफ़लता मिली, लेकिन फ़िर समाज गांव स्तर पर जाति में विभक्त हो गयाl संघ ने इसे पहचानकर पार्टी की कमजोरी मानाl

संघ सूत्रों के मुताबिक भाजपा का नया अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो संघनिष्ठ होने के साथ मुद्रा दोष मुक्त हो और सनातन को लेकर चलने वाला होl दूसरी तरफ़ वर्तमान भाजपा हाई कमान  यूपी के चुनावी कुरु क्षेत्र को दो या तीन खण्ड में इसलिए भी करने पर गंभीर है ताकि पीडीए के जरिए गांवों तक पहुंची जातिवाद की राजनीति खत्म हो और सनातान का भाव जन मानस में फ़िर जागृत होl केन्द्र सरकार के पास प्रदेश को छोटा, बड़ा या अलग करने का अधिकार होता हैl इधर बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती फ़िर से अपने भतीजे आकाश आनंद को आगे लाकर पार्टी के अस्तित्व को बचाने में जुट गई हैं l

इन सबसे अलग यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अपने तीन विंदुओं में अपराध को तो नियंत्रण में कर लिए लेकिन बेरोजगारी और भ्रष्टाचार रोकने में चूक गएl इसीलिए लोस चुनाव के बाद नौकरशाही पर चोट करने के साथ बेरोजगारी दूर करने के मामले में कारवाई की रफ़्तार बुलेट ट्रेन की तरह कर दिए l ग्राउंड लेबल से उन्हें रिपोर्ट उनकी निजी टीम खरी- खरी दे रही हैl सूत्रों के मुताबिक भ्रष्टाचार व बेरोजगारी जैसे पेपर लीक आदि के मामले में नौकरशाही की भूमिका मुख्य रूप से उभरी हैl कुछ अफसर तो दिल्ली में बैठे हाई कमान से संचालित थे बाकी को 2017 से पूर्व की सरकारों के चलते वर्तमान सरकार को बनावटी रिपोर्ट देने और लूट- खसोट में लिप्त रहने की पड़ी आदत ने आमजन को भाजपा की प्रदेश सरकार से दूर कर दिया था l अब निजी टीम की रिपोर्ट से सीएम को दूध और पानी अलग दिखने लगा l भ्रष्टाचार में लिप्त नौकरशाही के साथ तमाम माननीय भी लपेटे में आएंगेl योगी के सामने मिशन 2027 ही मुख्य लक्ष्य है l वह भ्रष्टाचार की नींव उखाड़ने के साथ बेरोजगारी को हर सम्भव दूर करके मिशन तक पहुँचने का रास्ता बनाने में जुटे हैं l

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