ठाकुरों के विरोध की चिंगारी गुजरात से चली, पूर्वांचल में धधकी
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लोकसभा चुनाव 2024 में ठाकुरों का टसल
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-जौनपुर संसदीय क्षेत्र के ठाकुर वोटर मौन, मछलीशहर सीट पर एनडीए गठबंधन के नेताओं के बयान पर उबाल
-जनपद की दोनों सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष की रफ्तार बढ़ी, अब जातीय वोटर बनते जा रहे जीत- हार के फैक्टर
-जौनपुर सीट पर दो दलों के प्रत्याशी अपने ही संगठन में खींचतान के हैं शिकार
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--कैलाश सिंह--
जौनपुर l लोकसभा चुनाव 2024 में क्षत्रियों का विरोध और किसानों का आंदोलन एन डी ए गठबंधन पर शुरुआत में ही भारी पड़ने लगा l ठाकुरों से टसल की चिंगारी गुजरात से चली और पश्चिमी यूपी में जब धधकी तो भाजपा हाई कमान के कान खड़े हुए लेकिन तब तक दो फेज का चुनाव पार हो गया था l आग की आंच तब तक राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश को लपेटे में लेकर पूर्वांचल में सुलगने लगी l इस बीच भाजपा के 400 पार के नारे पर संविधान बचाओ का नारा भारी पड़ चुका था l विपक्षी गठबंधन आरक्षण को भी मुद्दा बनाकर सीएम योगी आदित्यनाथ को हटाये जाने की हवा फैलानी शुरू कर दी l जब भाजपा जाटों को सेट करने में लगी थी तब विपक्षी दल ठाकुरों के विरोध की चिंगारी को हवा दे रहे थे l पुर्वी यूपी में जब भाजपा हाई कमान बृज भूषण शरण सिंह, राजा भैया- रघुराज सिंह, धनंजय सिंह को सेट किये तब तक उसके गठबंधन के सहयोगी अपना दल और राजभर की पार्टी के नेता ठाकुरों पर जहर उगलने लगे l
जौनपुर की दोनों सीटों में मछली शहर के मडीयाहूँ विधान सभा के जवनसी आदि दर्जनों गावों में राजभर की पार्टी के नेता के निहायत गन्दे वक्तव्य ने चिंगारी को जंगल में लगी आग बना दिया l यहाँ के भाजपा प्रत्याशी द्वारा ठाकुर- ब्राह्मण युवकों पर दो साल पूर्व कराये गए एससी, एसटी के मुकदमे कोढ़ में खाज बने थेl तब तक राजभर नेता द्वारा सभा में ठाकुरों को दी गयी गाली ने जख्म को भयानक कैंसर का रूप दे दियाl यहाँ सपा, बसपा और भाजपा तीनों के प्रत्याशी एक ही जाति वर्ग से हैं, यहाँ लडाई पहले से त्रिकोणीय बनी हुई थी, अब स्थिति डांवाडोल होने लगी है l इस तरह भाजपा के लिए उसके ही सहयोगी पार्टियों के नेता भस्मासुर बन गए हैं और एनडीए की यूपी में सीटों को ये 40 से नीचे समेटने में लगे हैं l
जौनपुर संसदीय सीट पर पार्टी द्वारा घोषित पैराशूट उम्मीदवार भाजपा के स्थानीय संगठन के ही गले नहीं उतरा l यही कारण है की टिकट घोषणा के बाद से अब तक चुनाव चढ़ा ही नहीं l प्रत्याशी का अपना दाग तो है ही उपर से उसके सारथी कथित 'रत्न' भी अपना आभा मण्डल सांप के केंचुल की तरह ऐसा छोड़े हैं जिसमें वोटर तो दूर भाजपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं में भी आक्रोश का कारण बना है l l उनके भाजपा में आने के बाद महाराष्ट्र का दाग रूपी भूत जौनपुर में नृत्य करने लगे हैं l उपर से इनके कथित रत्न ऐसा प्रोटोकाल बनाए हैं मानो ये प्रत्याशी की बजाय मन्त्री हो चुके हैं l यहाँ भी पूर्व सांसद धनंजय श्रीकला के चुनाव से हटने के बाद जिस फायदे की उम्मीद थी वह उल्टी पड़ गई l सपा प्रत्याशी जहाँ अदर बैकवर्ड वोट को साम- दाम से साधने में जुटा है और मुस्लिम को अपना फिक्स वोट मानकर चल रहा, लेकिन यह वोटर अभी नब्ज देख रहा है lवहीं बसपा उम्मीदवार को यादव होने का भरपूर फायदा मिल रहा है, दलित वोटर अपने दल में अंगद की तरह पांव जमाये है l
(विस्तृत अगली किस्त में)







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