ट्रिपल तलाक व हलाला ने निकाला एक और विवाहिता के अरमानों का जनाजा
पति ने ही अपने छोटे भाई के साथ हलाला कराने पर किया मजबूर
गर्भ में पल रहे आठ माह के बच्चे की भी पति की पिटाई से हुई मौत
आखिर कब तक मुस्लिम महिलाएं इन कुरीतियों का होती रहेगीं शिकार
सै.हसनैन कमर दीपू
जौनपुर। आजमगढ़ जनपद की रहने वाली दो वर्ष पूर्व शादी के बंधन में बंधी मुस्लिम युवती को इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि जिन अरमानों को सजाकर वह डोली में बैठ क र ससुराल जा रही है उसके वे सभी अरमान परवान नहीं चढ़ेंगें। तकदीर उसके साथ वहां ऐसा भयानक खेल खेलेगी जिसका भय उसे जीवन भर सताता रहेगा। इतना ही नहीं उसके सपनों को पंख लगने के बजाय उसके नये अपने उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे को भी नहीं बख्शेगें। कानून की धज्जियां उड़ार्इं जायेगीं और दो वर्ष में ही उसे तीन तलाक और हलाला जैसे रूढ़िवादी परंपराओं से गुजरने के साथ दैहिक शोषण का भी शिकार होना पड़ेगा। वोह तो भला हो शहर कोतवाल मिथिलेश कुमार मिश्रा का जिन्होंने मामले के संज्ञान में आते ही इसे गंभीरतापूर्वक लिया और पीड़िता को न्याय दिलाने का आश्वासन देने के साथ आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई भी शुरू कर दी।
गौरतलब हो कि आजमगढ़ जनपद के दीदारगंज थाना क्षेत्र के नूरपुर गांव की रहने वाली सायमा (काल्पनिक नाम) का विवाह नगर कोतवाली क्षेत्र के बड़ी मस्जिद मुहल्ला उमर खां निवासी अबुहुरैरा के साथ 24 सितंबर 2022 को इस्लामिक रीति रिवाज से संपंन हुआ। परिवार के लोगों द्वारा विवाह में तीन लाख नगद समेत आजीविका के काफी संसाधन भी वर पक्ष को दिए गए। लड़की विदा होकर ससुराल आई और कुछ ही दिनों में दहेज लोभियों की शिकार होने लगी। सायम की मानें तो पति व परिवार के अन्य लोग दो लाख रूपये और मांगने लगे इस दौरान वह गर्भवती भी हो गई लेकिन उसे जबरन मायके भेज दिया गया और पैसा लेकर आने की बात कही गई। वह बिना पैसे के जब दुबारा कई महीने बाद जब ससुराल आई तो आग बबूला हुए पति ने उसकी जमकर पिटाई कर दी जिससे गर्भ में पल रहे आठ माह के बच्चे की भी मौत हो गई। जानकारी होते ही मायके के लोग पहुंचे और उसे लेकर आजमगढ़ गये जहां सरायमीर के एक हॉस्पिटल में आपॅरेशन के जरिए मृतक बच्चे को निकाला गया और किसी तरह उसकी जान बचाई गई लेकिन इसी दौरान पति ने उसे तीन तलाक दे दिया लेकिन दो तीन माह के बाद वह फिर अचानक ससुराल पहुंचा और लड़की को साथ रखने की बात कहकर साथ ले आया। पीड़िता के मुताबिक जब वह सब कुछ भूलकर पुन: घर आ गई तो पति ने तलाक हो जाने की बात कहकर अपने भाई के साथ हलाला करने और पुन: निकाह करने की बात कही और जबरदस्ती उसका हलाला भी देवर के साथ करा दिया गया। हलाला हो जाने के बाद पति ने फिर से निकाह करने से इंकार भी कर दिया। जब पीड़िता न इधर की हुई और न उधर की तो उसने नगर कोतवाली पहुंचकर अपनी कहानी कोतवाल मिथिलेश मिश्रा को बताई और उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया। सवाल यह उठता है कि आखिर कानून बनने के बाद भी कब तक लोग उसकी धज्जियां उड़ाते रहेगें और इस तरीके से कब तक मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक और हलाला जैसी रूढ़िवादी कुरीतियों का शिकार होकर दैहिक शोषण के लिए मजबूर होती रहेगीं। फिलहाल मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के बयान के बाद पीड़िता को उसके मायके भेज दिया गया है।








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