शिराज- ऐ- हिन्द-जौनपुर के आठवीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस रविवार को नाज़िम अली खान के इमामबाड़े से अंजुमन हुसैनिया के नेतृत्व में उठा, जिसमें शामिल शहर की 20 से ज्यादा मातमी अंजुमनों ने नौहा वा मातम कर कर्बला के शहीदों को नज़राने अक़ीदत पेश किया,
अब्बास का मातम है, वफादार का मातम...
अब्बास जैसा भाई कोई दूसरा नहीं : डा. कल्बे रजा
आठ मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस बरामद, आयोजित हुई मजलिसें
नगर सहित ग्रामीण इलाकों में निकला जुलजनाह अलम, ताबूत
जौनपुर।
आठ मोहर्रम को जनपद के सभी इलाकों में मजलिसों एवं जुलूस का आयोजन हुआ। रविवार को नगर का ऐतिहासिक आठ मोहर्रम का जुलूस अपने रिवायती अंदाज में मोहल्ला नसीब खां मंडी स्थित इमामाबाड़ा नाजिम अली खां से उठा,जो अटाला मस्जिद स्थित इमामबाड़ा शेख अलताफ हुसैन पर पहुंचकर समाप्त हुआ। ग्वालियर से आये मशहूर वैज्ञानिक जाकिर डा. कल्बे रजा नकवी ने मजलिस को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया में इमाम हुसैन का गम इस समय मनाया जा रहा है। इमाम हुसैन ने उस समय के सबसे बड़े आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाकर न सिर्फ अपना भरा पूरा परिवार कुर्बान कर दिया बल्कि आज जो इस्लाम जिंदा है वो उनकी शहादत के दम पर ही है। आज जिस तरह से पूरी दुनिया में आतंकवाद फैल रहा है जरुरत है उसे भी हम सब मिलकर उखाड़े फेंकने में मुल्क की मदद करें, तभी इमाम हुसैन को सच्ची श्रद्धांजलि दी जाएगी। कर्बला में जिस तरह से हजरत इमाम हुसैन ने अपने छह माह के बच्चे जनाबे अली असगर की शहादत पेश करने से भी पीछे नहीं हटे। जिसके बाद अंजुमन हुसैनिया बलुआ घाट के नेतृत्व में शबीहे अलम जुलजनाह और गहवारे अली असगर बरामद हुआ। साथ ही नगर की 20 से ज्यादा मातमी अंजुमनों ने नौहा मातम करने लगी। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ अटाला मस्जिद तक पहुँचेगा, यहां इमामबाड़ा शेख इल्ताफ हुसैन से तुर्बत को निकालकर गहवारे अली असगर व जुलजनाह से मिलाया गया, इस मिलन को देखकर लोगों की आंखों से आंसू छलकने लगती है जुलूस का संचालन परवेज हसन कर रहे थे। जुलूस पुन: इमामबाड़ा नाजिम अली खां में जाकर समाप्त हुआ। जुलूस में डा.मेहर अब्बास, शोएब अहमद, हाजी जफर अब्बास,सहित हज़ारो अजादार मौजूद थे इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी सुनील कुमार सिंह, शहर कोतवाल पवन कुमार उपाध्याय,सहित सभी चौकी इंचार्ज व भारी पुलिस बल तैनात रहे।







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