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मोहर्रम:(करबलनामा 3) : तीन मोहर्रम को कर्बला में जमा हो चुके थे 10 हजार यजीदी फौजी।हज़रत इमाम 
हुसैन (अ.स)ने कहा यदि तुम लोग चाहो तो मैं यहां से भी छोड़कर चला जाऊं
जौनपुर। दो मोहर्रम का वक्त गुजर जाता है और तीसरी मोहर्रम आ जाती है। कुमकामेजख्खार पृष्ठ 310 जिल्द 1 के अनुसार इमाम हुसैन के कर्बला में पहुंचने के दूसरे दिन अर्थात 3 मोहर्रम को उमर बिन सअद अपने 4 हजार फौजियों के साथ कर्बला की जमीन पर पहुंच जाता है और हुसैनी खैमों के करीब पड़ाव डाल देता है। तबरी के अनुसार सबसे पहले अजराबिन कैश अहमसी को वह हुसैन के पास भेजता है क्योंकि वह भी इमाम हुसैन को खत भेजकर बुलाने वालों में शामिल था इसलिए वह जाने से इनकार करता है और कई दूसरे लोग भी उससे क्षमा मांग लेते है लेकिन कसीर बिन अब्दुल्लाह शोअबी जो एक राक्षस प्रवृत्ति का स्वामी था उसने इब्ने सअद से यह कहकर जाने की आज्ञा मांगी कि कहो तो हुसैन से सिर्फ पूछकर आ जाऊं या उनका कत्ल भी कर दूं लेकिन इब्ने सअद ने उसे कत्ल से मना करते हुए कहा जाओ और सिर्फ इतना पूछकर आओ की हुसैन यहां क्यों आये? जैसे ही कसीर बिन अब्दुल्लाह हुसैनी खैमागाह के करीब पहुंचा अबु शायमा सायदी इमाम की खिदमत में हाजिर हुए और फरमाया आपकी तरफ वो व्यक्ति आ रहा है जो सबसे बदतरीन व्यक्तियों में से है और अबुशामा फौरन उसके पास पहुंचे और कहा कि अगर तुम इमाम से मुलाकात करना चाहते हो तो तुम्हें अपनी तलवार यही छोड़नी होगी। उसने इनकार किया और कहा कि मैं एक पत्रवाहक की हैसियत से आया हूं अगर तुम लोग संदेश जानना चाहते हो तो बताऊंगा वरना वापस चला जाऊंगा लेकिन अबूशामा ने उससे कहा कि तुम्हारी तलवार के कब्जे पर हाथ हमारा होगा इसके बाद ही तुम पैगाम सुना सकते हो लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया और दोनों के बीच कहा सुनी हुई और वह वापस चला गया। उसके वापस जाने के बाद तबरी का बयान है कि इब्ने सअद ने कुर्राबिनकैश खंजली को भेजा वह जैसे ही इमाम के खैमों के करीब पहुंचा इमाम ने साथियों से पहुंचा कोई आने वाले व्यक्ति को पहचानता है। हबीब इब्ने मजाही ने कहा मैं इसे एक अच्छे सलाहकार के रुप में जानता था लेकिन मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि यह उमरे सअद की तरफ से आएगा। कुर्रा नजदीक आकर इमाम को सलाम करता है और इब्ने सअद का संदेश सुनाता है। इमाम ने अपने जवाब में कहा कि तुम्हारे शहर के लोगों ने मुझे यहां आने के लिए पत्र भेजकर बुलाया है अगर उनकी राय बदल गयी है और तुम लोग यह नहीं चाहते की हम यहां भी रहे तो हम लौटकर कहीं और चले जाएंगे। उसके वापस जाने के बाद पेशरेसअद ने इब्ने जयाद को खत लिखाजिसमें उसने लिखा था मैंने कर्बला पहुंचने के बाद हुसैन के पास अपने पत्रवाहक भेजे और उनसे यहां आने का शबब मालूम किया तो उन्होंने यहां के लोगों द्वारा बुलाये जाने की बात कहते हुए यह भी कहा है कि अगर हमारा यहां पसंद नहीं है तो हम कहीं और चले जाएंगे। हस्सान बिन फायद बिन बकर अबसी का बयान है कि जिस वक्त इब्ने सअद का खत पहुंचा वह भी इब्ने जयाद के पास मौजूद था। खत पढ़ने के बाद उसने कहा अब जबकि हुसैन हमारे चंगुल में गढ़ चुके है। हुसैन हमसे छुटकारा पाना चाहते है लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। उसके बाद उसने पुन: इब्ने सअद को पत्र का जवाब दिया। जिसमें उसने स्पष्ट तौर पर लिखा कि हुसैन से कहो कि वो और उनको सभी साथी यजीद की बैय्यत स्वीकार कर ले जब वो लोग बैय्यत कर ले तो फिर जो मुनासिब होगा उसे किया जाएगा।


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